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वक्त

जसवंतलाल खटीक
राजसमन्द(राजस्थान)
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वक्त-वक्त की बात है,
जीवन नहीं आसान है।
वक्त जब मारे पलटी,
जीवन नरक समान है॥

जब भी वक्त ने खेला,
साधु बन जाता है चेला।
कर दे गर लापरवाही तो,
वक्त कर देता अकेला॥

कल तक जो था राजा,
वक्त के आगे बना फकीर।
वक्त किसी का नहीं होता,
छोड़ना पड़ जाता शरीर॥

कभी ना कर घमंड बन्दे,
वक्त किसी का सगा नहीं।
वक्त सभी का आता है,
वक्त को किसी ने ठगा नहीं॥

वक्त का नहीं है भरोसा,
पल में प्रलय आ जायेगी।
लाख दुःख भले हो लेकिन,
पल में जिंदगी सँवर जाएगी॥

वक्त होता बड़ा बलशाली,
किसी के सामने झुका नहीं।
निरन्तर चलता रहता है,
थक कर कभी रुका नहीं॥

कल तक जो तारीख बदलता,
आज तारीख कैलेण्डर बदल रही।
वक्त सभी का आता है बन्दे,
ये घड़ी निरन्तर चल रही॥

साल आज विदा हो गया,
सब कर लो एक-दूजे से वादा।
राग-द्वेष दुःख-दर्द मिटाकर,
हर पल जियेंगे वक्त से ज्यादा॥

वक्त बड़ा अनमोल है ‘जसवंत’,
पल-पल को जिया करो।
व्यर्थ में जिंदगी निकल जाएगी,
जीवन का रस पिया करो॥

परिचय-जसवंतलाल बोलीवाल (खटीक) की शिक्षा बी.टेक.(सी.एस.)है। आपका व्यवसाय किराना दुकान है। निवास गाँव-रतना का गुड़ा(जिला-राजसमन्द, राजस्थान)में है। काव्य गोष्ठी मंच-राजसमन्द से जुड़े हुए श्री खटीक पेशे से सॉफ्टवेयर अभियंता होकर कुछ साल तक उदयपुर में निजी संस्थान में सूचना तकनीकी प्रबंधक के पद पर कार्यरत रहे हैं। कुछ समय पहले ही आपने शौक से लेखन शुरू किया,और अब तक ६५ से ज्यादा कविता लिख ली हैं। हिंदी और राजस्थानी भाषा में रचनाएँ लिखते हैं। समसामयिक और वर्तमान परिस्थियों पर लिखने का शौक है। समय-समय पर समाजसेवा के अंतर्गत विद्यालय में बच्चों की मदद करता रहते हैं। इनकी रचनाएं कई पत्र-पत्रिकाओं में छपी हैं।