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संस्कार देती है साहित्यिक पत्रकारिता

सम्मान…

इंदौर (मप्र)।

संपादक के पास ‘सम्यक दृष्टि’ होनी चाहिए, जो मोती चुने, लेकिन आज मोती चुनने वाले संपादक कम होते जा रहे हैं। सम्पादक राकेश शर्मा उसी ‘हंस दृष्टि’ के सम्पादक हैं।
साहित्यिक पत्रिका ‘वीणा’ (इंदौर) के सम्पादक राकेश शर्मा को मीडिया विमर्श परिवार द्वारा रविवार को इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित सम्मान समारोह में १५वें पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित करते हुए यह बात मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार गिरीश पंकज ने कही। समारोह की अध्यक्षता मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष राजेश लाल मेहरा ने की। समारोह में सम्पादक रविनंदन सिंह, हिंदी साहित्य अकादमी के मप्र के निदेशक डॉ. विकास दवे और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर की पत्रकारिता अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली नरंगुदे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अध्यक्षता करते हुए आयोग के अध्यक्ष श्री मेहरा ने कहा कि, साहित्य यशस्वी होगा, तो हमारा राष्ट्र यशस्वी होगा।
‘मीडिया विमर्श’ के सलाहकार संपादक प्रो. संजय द्विवेदी, सम्मानमूर्ति राकेश शर्मा व रवि नंदन सिंह ने भी अपनी बात रखीl
इस अवसर पर प्रख्यात साहित् संचालन अंकुर विजयवर्गीय ने कियाl धन्यवाद ज्ञापन साहित्यकार मुकेश तिवारी ने दिया।

*सम्मान के लिए राकेश शर्मा का चयन प्रशंसनीय-डॉ. दवे
समारोह में निदेशक डॉ. दवे ने कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान के लिए राकेश शर्मा का चयन प्रशंसनीय है। राकेश जी ने साहित्यिक पत्रकारिता के धर्म का बखूबी निर्वहन किया है।

*मुख्यधारा से आगे है साहित्यिक पत्रकारिता-डॉ. नरगुंदे
सम्मान जे इस अवसर पर अतिथि डॉ. नरंगुदे ने कहा कि साहित्यिक पत्रिका मुख्यधारा की पत्रकारिता के समानांतर ही नहीं, अपितु उससे आगे है। इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के बड़े प्रभाव के बाद भी प्रकाशित साहित्य का अपना महत्व है।

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