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सबने देखा कश्मीर की बदलती तस्वीर को

ललित गर्ग
दिल्ली
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श्रीनगर में जी-२० के पर्यटन कार्यसमूह के सम्मेलन से जम्मू-कश्मीर के बदलते सुखद एवं लोकतांत्रिक स्वरूप, पर्यटन को नई दिशा मिलने एवं बॉलीवुड के साथ रिश्ते मजबूत होने का आधार मजबूत हुआ है। बीते ७५ साल से जो हालात रहे, जिनमें विदेशी ताकतों का भी हाथ रहा है, उसमें एक पनपी सामाजिक शोषण, आतंक, अन्याय, अशांति एवं पक्षपात की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिए जाने की तस्वीर सामने आई है। वैश्विक और टिकाऊ पर्यटन को प्रोेत्साहन देने की दृष्टि से सम्मेलन का कश्मीर में आयोजन जम्मू कश्मीर की डेढ़ करोड़ की आबादी के लिए गौरव की बात है।
श्रीनगर में डल झील के किनारे भारत सरकार ने इस आयोजन को भव्य एवं सुरक्षित परिवेश देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। चीन एवं पाकिस्तान के विरोध के बावजूद भारत ने अपने आंतरिक मामलों में किसी अन्य देश की आपत्ति सहन करने से साफ इंकार करते हुए न केवल साहस का परिचय दिया, बल्कि भारत का हर तरह से शक्ति सम्पन्न होने का भी संकेत देकर विरोधी शक्तियों को चेताया है। ऐसा करना आवश्यक था, क्योंकि भारत को अपने किसी भी भू-भाग में हर तरह के आयोजन करने का अधिकार है-वे चाहे अंतरराष्ट्रीय स्तर के ही क्यों न हों।
भारत न केवल आतंरिक मामलों में बल्कि दुनिया में अपनी स्वतंत्र पहचान को लेकर तत्पर है। दिनों-दिन शक्तिसम्पन्नता की ओर अग्रसर होते हुए चीन और पाकिस्तान को उसकी जमीन दिखाने में भारत सफल रहा है। चीन की दोगली नीति एवं कुचेष्टाओं पर भारत ने करारा जबाव दिया है। कश्मीर के मामले में चीन अनेक बार अपनी फजीहत पहले भी करा चुका है। उसने पाकिस्तानी आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंधित करने की पहल में हर बार अड़ंगा लगाया, लेकिन कई मौकों पर उसे मुँह की खानी पड़ी। चीन अपनी हरकतों से यही बता रहा कि आतंकवाद के मामले में उसकी कथनी-करनी में अंतर है। यह अंतर दुनिया भी देख रही है, लेकिन चीन सही रास्ते पर आने को तैयार नहीं। अकेला पड़ा चीन अपनी ही चालों से पस्त होता रहा है, उसने अरुणाचल प्रदेश में भी जी-२० की बैठक का बहिष्कार किया था, लेकिन भारत अपने निर्णय पर अडिग रहा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रभावी नेतृत्व में भारत सरकार को अपना यह अडिग एवं साहसिक रवैया जारी रखते हुए चीन एवं पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब निरन्तर देते रहना चाहिए।
रूस-यूक्रेन में युद्ध दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता है, समूची दुनिया युद्ध-मुक्त परिवेश चाहती है। कुछ चीन जैसे देश हैं, जो इस सोच में बाधा बने हुए हैं इसलिए स्पष्ट है कि अधिकांश देशों ने चीन को आईना दिखाना आवश्यक समझा। उनका यह फैसला चीन की फजीहत भी है और इस पर मुहर भी कि जम्मू-कश्मीर से विभाजनकारी अनुच्छेद ३७० खत्म करने का भारत का निर्णय सही था।
भारत की ताकत का निरन्तर विश्व मंचों पर आभास होना सुखद संकेत है। यह ताकत इसलिए भी बढ़ रही है कि दुनिया अब शांति चाहती है, आतंक एवं युद्ध-मुक्त दुनिया की संरचना उसकी चाह है। भारत अपनी शांति, मानवतादी सोच एवं हिंसा-युद्ध विरोधी नीतियों से सभी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जिस तरह विश्व समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है, उससे यही पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की भूमिका बढ़ रही है एवं मजबूत हो रही है। इसका एक प्रमाण अभी हिरोशिमा में जी-७ की बैठक में मिला और फिर पापुआ न्यू गिनी में भी। दोनों देशों ने अपने सर्वोच्च सम्मान से श्री मोदी को सम्मानित किया है। असल में इन दोनों देशों के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के सर्वोच्च सम्मान से किसी अन्य देश केे व्यक्ति को सम्मानित किया जाना दुर्लभ बात है, ऐतिहासिक घटना है।
इस बैठक का मकसद दुनिया को कश्मीर की बदलती तस्वीर दिखाना है। विदेशी राजनयिकों ने यह तस्वीर बहुत नजदीक से देखी है कि, कश्मीर अशांति एवं आतंक की छाया से मुक्त हो रहा है और पाकिस्तान का यहाँ पर कोई प्रभाव नहीं है। घाटी की आवाम देश की मुख्यधारा में शामिल है और अब जमीनी स्तर पर लोकतंत्र मजबूत हुआ है, नए उद्योग आ रहे हैं, बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से हो रहा है। प्रौद्योगिकी पर सरकार की प्राथमिकताओं से जम्मू कश्मीर को एक डिजिटल समाज में बदला जा रहा है।
इतना तय है कि कश्मीर तेजी से बदल रहा है। निश्चित ही इस आयोजन से कश्मीर का नया अभ्युदय होगा। विकास के विभिन्न मापदंडों के आधार पर जम्मू कश्मीर भारत के विकसित क्षेत्रों की कतार में अग्रसर होगा। भारत सरकार आमजन को सामाजिक और आर्थिक रूप से खुशहाल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन सब स्थितियों को देखते हुए एवं जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-३७० हटाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान बुरी तरह से बौखलाया हुआ है और चीन केवल पाकिस्तान को ही तुष्ट करना चाहता है। क्योंकि चीन के आर्थिक हित उससे जुड़े हुए हैं।
जी-२० की बैठक कर भारत ने यह दिखा दिया है कि, कश्मीर में अब कोई विवाद नहीं है और यह भारत का अभिन्न अंग है। इसे भारतीय कूटनीति की जबर्दस्त सफलता के रूप में देखा जा रहा है कि, जब भी कोई देश किसी अंतर्राष्ट्रीय समूह का प्रमुख होता है या ऐसे अंतर्राष्ट्रीय बैठकों की मेजबानी करता है तो स्थल का चयन करना उसका विशेषाधिकार होता है।

जनकल्याण के लिए समर्पित संकल्पों से नए कश्मीर को आकार दिया जा रहा है। विश्व की आर्थिक एवं राजनीतिक शक्तियों को संचालित करने वाले देश अगर ईमानदारी से ठान लें तो दुनिया से आतंकवाद पर काबू पाया जा सकता है और कश्मीर की ही भांति दुनिया की तस्वीर बदली जा सकती है।

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