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साँवला कान्हा

प्रभावती श.शाखापुरे
दांडेली(कर्नाटक)
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बैरी साँवलिया ना छोड़े।
फागुन बहार आज॥
मधुर तान सुन मुरली की,रे!
लागे मोहे लाज॥

श्याम साँवला,राधा गोरी।
जैसे चाँद-चकोर॥
संग कन्हैया,नाचे राधा।
होकर प्रेम विभोर॥

प्रेम पियूष पिला कर कान्हा।
जता प्रेम की रीत॥
मोर मुकुट गिरिवरधारी ने।
सिखा दी प्रेम प्रीत॥

परिचय-प्रभावति श.शाखापुरे की जन्म तारीख २१ जनवरी एवं जन्म स्थान-विजापुर है। वर्तमान तथा स्थाई पता दांडेली, (कर्नाटक)ही है। आपने एम.ए.,बी.एड.,एम.फिल. और पी.एच-डी. की शिक्षा प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र-प्रौढ़ शाला में हिंदी भाषा की शिक्षिका का है। इनकी लेखन विधा-तुकांत, अतुकांत,हाईकु,कहानी,वर्ण पिरामिड, लघुकथा,संस्मरण और गीत आदि है। आपकी विशेष उपलब्धि-श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान मिलना है। श्रीमती शाखापुरे की लेखनी का उद्देश्य-कलम की ताकत से समाज में प्रगति लाने की कोशिश,मन की भावनाओं को व्यक्त करना,एवं समस्याओं को बिंबित कर हटाने की कोशिश करना है।