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हे गणपति दु:ख दूर करो

उमेशचन्द यादव
बलिया (उत्तरप्रदेश) 
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गणेश चतुर्थी विशेष…..

जानूँ ना पूजन की विधि बाबा,
भक्ति भजन की मुझको लूर नहीं।
हे देवा सुन लो अर्ज मेरी,
अबोध बालक हूँ मैं मगरूर नहीं।
यूँ तो देवों की फौज बड़ी,
पर तुम-सा कोई मशहूर नहीं।
हे गणपति दु:ख को दूर करो,
भक्ति भजन की मुझको लूर नहीं॥

हे प्रथम पूज्य गणनायक तुम,
रिद्धि-सिद्धि के दाता हो।
अगर हुई गलती तो माफ़ करो,
तुम मेरे भाग्य विधाता हो।
देवों के संकट दूर किए,
रख लो चरणों में दूर नहीं।
कहे ‘उमेश’ सदबुद्धि दे दो,
भक्ति भजन की मुझको लूर नहीं॥

परिचय–उमेशचन्द यादव की जन्मतिथि २ अगस्त १९८५ और जन्म स्थान चकरा कोल्हुवाँ(वीरपुरा)जिला बलिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी श्री यादव की शैक्षिक योग्यता एम.ए. एवं बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप कविता,लेख एवं कहानी लेखन करते हैं। लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना,हिंदी भाषा का विकास और प्रचार-प्रसार करना है।

 

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