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हक़ीक़त

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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जीवन है नाम
संघर्षों का,
कभी संघर्षों से
घबराना ना।

आज आई मुसीबत
कल टल जाएगी,
व्यर्थ जीवन अपना
गंवाना ना।

कहीं झुकना पड़े तो
झुक जाना,
किसी और को
कभी झुकाना ना।

अपने स्वार्थ के कारण
किसी जीव को,
गलती से भी
कभी सताना ना।

अपने दोषों को
छुपाने के लिए,
किसी निर्दोष पर
दोष लगाना ना।

अपने मन,वचन
कर्म से कभी,
किसी का
दिल दुःखाना ना।

भूखा हो जो
कभी पड़ौसी तेरा,
एक अन्न का दाना
खाना ना।

जहाँ मन में
मलिन विचार आए,
उस ज़गह पर
कभी जाना ना।

माँ-बाप की
सदा सेवा करना,
कभी भूल के
उन्हें सताना ना।

माँ-बाप के
आशीष से बढ़ कर,
दुनिया में
कोई ख़ज़ाना ना।

कभी वास्तु
कभी काल दोष,
इन दोषों पर
मढ़कर दोष,
कभी अपने दोष
छुपाना ना।

ये जिंदगी,
एक हक़ीक़त है।
बन जाए कहीं,
अफ़साना ना॥

परिचय– श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।