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ॐ नमः शिवाय

ममता तिवारी
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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शिव होना सहज नहीं,
शिव होने से पहले सत्य होना होगा
सत्य होने से पहले सत्य बोना होगा।

शिव होना सरल नहीं,
सरल होने से पहले गरल तो पीना होगा
गरल पीने से पहले तरल तो होना होगा।

शिव सुंदर होना महज नहीं,
सुंदर होने से पहले अहंकार खोना होगा
अहंकार खोने से पहले औघड़ तो होना होना।

श्मशान से भस्म लेना नहीं,
भस्म छूने से पहले भस्मासुर से लड़ना होगा
आप्लाव भस्मीभूत करना होगा।

अविनाशी होने से पहले,
विनाश प्रलयंकारी क्षण से जूझना होगा
दावानल मन की पी कर जहर कंठ घरना होगा।

काशी में रहना खेल नहीं,
जीवव विकास की धारा धरना होगा
धारा बहाने से पहले गंगा धारण करना होगा।

चाँदनी शीतलता आसान नहीं,
शीतलता पाने से पहले अंगारे खाना होगा
अंगारे खाने से पहले कुत्सित विचार बुझाना होगा।

त्रिशूल उठाना भूल न कर,
शूली में चढ़ कर शूल सभी सहना होगा
शूल सहन कर फूलों में फिर चलना होगा।

विषधर धरना क्लिष्ट बड़ा,
सरल दिखती विकट क्षण को वलय करना होगा।
शुद्धाचरण वलय में रहना होगा॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।

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