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ज़रा सोंचो..

डॉ.आभा माथुर
उन्नाव(उत्तर प्रदेश)
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कन्याभोज करने वालों
तुम ध्यान से मेरी बात सुनो,
यदि आये पसन्द यह बात मेरी
तो इसको भरे समाज कहो।
यूँ तो छोटी बच्ची को तुम
देवी कह पूजा करते हो,
पर वहीं अजन्मी कन्या को
यमलोक तुम्हीं पहुँचाते हो।
मासूम बच्चियों को पाकर
राक्षसों की लार टपकती है,
वह छोटी है,क्या समझेगी
टॉफ़ी पा गोद में आती है।
अवसर पाते ही जो नर से
एक नरपिशाच बन जाते हैं,
वे ही नर ख़ुद को इस समाज
का रखवाला बतलाते हैं।
क्या सारे भारतवासी ही
मानवता को हैं भूल गये ?
क्यों मानव,दानव बन बैठा ?
क्यों पाप-पुण्य सब भुला दिये ?
पाठक आगे की बात सुनो
पंचायत का निर्णय देखो,
है गैंगरेप का दण्ड मिला
एक बंगदेश की नारी को।
सोचा दण्ड के माध्यम से
उनकी ‘दावत’ हो जायेगी,
वे तो दण्डित कर रहे उसे
उन पर कोई आँच न आयेगी।
वह इसी गाँव की बेटी थी
‘काका’ कह तुम्हें बुलाती थी,
तुमने ही ऐसा दण्ड दिया
मानवता थर्रा जाती थी।
अब गर्वित सर ऊँचा करके
तुम जग में घूमा करते हो,
थू,तुम नाली के कीड़ों पर
जो ख़ुद को मर्द बताते हो।
कुछ पंचायत-सदस्य बनकर
ख़ुद को भगवान समझ बैठे,
जीने दें तुमको या मारें
अपना अधिकार समझ बैठे।
क्यों ग़ैर जाति से प्रेम किया ?
क्यों अपने गाँव में प्रेम किया ?
ऐसे नाना अपराधों का है
केवल एक दण्ड ‘हत्या।’
दुर्भाग्य विवश कोई नारी
किसी भेड़िये का शिकार बनी,
भेड़िये को देते दोष नहीं
नारी निन्दा की पात्र बनी।
कब तक भारतवासी पीड़ित को
निन्दित कर तड़पायेंगे ?
ज़ख़्मों पर मरहम रख न सके
वे जिह्वा बाण चलायेंगे।
हाँ! भीष्म! अगर तुम होते तो
तत्काल प्राण तुम तज देते,
तुमने न उठाया धनुष-बाण
नारी माना था शिखन्डी को।
वह तो था अर्द्ध नारी लेकिन
उस पूर्ण नारी की करो बात,
वध कर अपनी ही पुत्री का
मूँछों पर देते ‘मर्द’ ताव।
जितना सोंचो उतनी ही यह
सूची बढ़ती ही जाती है,
कुछ कुकृत्य तो ऐसे हैं
कहते जिह्वा कट जाती है।
रक्षक ही जब भक्षक बनते
तब पाये निर्भया ठौर कहाँ ?
यह इसी देश की गाथा है
जग में ऐसा कोई देश कहाँ ?
ईश्वर मेरे भारत का तुम
उद्धार करो,मत देर करो,
अनुचित और उचित में भेद करें
ऐसा विवेक हम सबको दो॥

परिचय–डॉ.आभा माथुर की जन्म तारीख १५ अगस्त १९४७ तथा जन्म स्थान बिजनौर (उत्तर प्रदेश)हैl आपका निवास उन्नाव स्थित गाँधी नगर में हैl उन्नाव  निवासी डॉ.माथुर की लेखन विधा-कविता,बाल कविताएं,लेख,बाल कहानियाँ, संस्मरण, लघुकथाएं है। सामाजिक रुप से कई संगठनों से जुड़कर आप सक्रिय हैं। आपकी पूर्ण शिक्षा फिलासाफी ऑफ डॉक्टरेट है। कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश है। सरकारी नौकरी से आप प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। साझा संग्रह में डॉ.माथुर की कई रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही अनेक रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हैं। सामाजिक मीडिया समूहों की स्पर्धाओं में आप सम्मानित हो चुकी हैं। इनकी विशेष उपलब्धि आँग्ल भाषा में भी लेखन करना है। आपकी लेखनी का उद्देश्य आत्म सन्तुष्टि एवं सामाजिक विसंगतियों को सामने लाना है, जिससे उनका निराकरण हो सके। आपमें दिए गए विषय पर एक घन्टे के अन्दर कविता लिखने की क्षमता है। अंग्रेज़ी भाषा में भी लिखती हैं।