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ज़िंदगी का सफर

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’ 
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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कुछ इस तरह मैंने…
ज़िंदगी के सफर को,
खुशनुमा बना लिया….।

मुश्किल था यूँ चलना,
इसे आसां बना लिया…।

हर कदम पर थी ठोंकरें,
इन्हें पार करने का इरादा बना लिया…।

ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव में,
खुद को पका लिया…।

कई मौसम बदले,
सभी मैं खुद को ढाल लिया…।

गम का अंधियार छाया,
मैंने सुख का सूरज निकाल लिया…।

पग-पग पर थी चुनौतियां,
उनमें खुद को डटा लिया…।

लोगों ने अपने रंग बदले,
जैसे कोई लिबास हटा लिया…।

जीवन के पड़ाव ने,
मुझको फौलाद बना दिया…।

मेरी आँखों के आँसूओं को,
अब मैंने शोला बना लिया…।

अपने पथ के काँटों को,
अब मैंने फूल बना लिया…।

बाधाओं को मैंने,
अब पार कर लिया…।

मुश्किल था यूँ चलना,
मैंने इसे आसां बना लिया…।

यूँ ही कट जाती ये ज़िन्दगी,
पर मैंने इसे नया आयाम दिया…
अब मैंने अपने अस्तित्व का अर्थ पा लिया…॥

परिचय-श्रीमती अंतुलता वर्मा का साहित्यिक उपनाम ‘अन्नू’ है। ११ मई १९८२ को विदिशा में जन्मीं अन्नू वर्तमान में करोंद (भोपाल)में स्थाई रुप से बसी हुई हैं। हिंदी,अंग्रेजी और गुजराती भाषा का ज्ञान रखने वाली मध्यप्रदेश की वासी श्रीमती वर्मा ने एम.ए.(हिंदी साहित्य),डी.एड. एवं बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है।आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी (शास. सहायक शिक्षक)है। सामाजिक गतिविधि में आप सक्रिय एवं समाजसेवी संस्थानों में सहभागिता रखती हैं। लेखन विधा-काव्य,लघुकथा एवं लेख है। अध्यनरत समय में कविता लेखन में कई बार प्रथम स्थान प्राप्त कर चुकी अन्नू सोशल मीडिया पर भी लेखन करती हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-चित्रकला एवं हस्तशिल्प क्षेत्र में कई बार पुरस्कृत होना है। अन्नू की लेखनी का उद्देश्य-मन की संतुष्टि,सामाजिक जागरूकता व चेतना का विकास करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महादेवी वर्मा,मैथिलीशरण गुप्त, सुमित्रा नन्दन पंत,सुभद्राकुमारी चौहान एवं मुंशी प्रेमचंद हैं। प्रेरणा पुंज -महिला विकास एवं महिला सशक्तिकरण है। विशेषज्ञता-चित्रकला एवं हस्तशिल्प में बहुत रुचि है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“हमारे देश में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती है,परंतु हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जो देश के अधिकांश हिस्सों में बोली जाती है,इसलिए इसे राष्ट्रभाषा माना जाता है,पर अधिकृत दर्जा नहीं दिया गया है। अच्छे साहित्य की रचना राष्ट्रभाषा से ही होती है। हमें अपने राष्ट्र एवं राष्ट्रीय भाषा पर गर्व है।