पटना (बिहार)।
मंत्रिमंडल सचिवालय के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में छज्जूबाग स्थित फणीश्वरनाथ रेणु सभागार (हिंदी भवन) में सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, महादेवी वर्मा एवं फणीश्वरनाथ रेणु की जयंती के अवसर पर समारोह आयोजित किया गया। अध्यक्षता विभागीय अपर सचिव सह निदेशक एम.एस. परवेज आलम ने की।
प्रारम्भ में आमंत्रित विद्वानों द्वारा दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर व्याख्यान सत्र में नवदीप प्रतिभा (दक्षिण बिहार केंद्रीय विद्यालय, गया), श्रुति राज (राजकीय उ.मा. महा., चंपारण), सुमंगल तथा पाटलिपुत्र विवि के स्रातकोत्तर हिंदी विभाग के कुंदन कुमार ने फणीश्वरनाथ रेणु, महादेवी वर्मा एवं ‘अज्ञेय’ के साहित्यिक अवदान पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ता तथा हिंदी सलाहकार समिति (भारत सरकार) के सदस्य वरिंद्र कुमार यादव ने कहा कि आज हिंदी को साहित्य की सीमाओं से आगे बढ़ाकर व्यापक जीवन और समाज से जोड़ने की आवश्यकता है। महादेवी वर्मा ने अपने काव्य में आध्यात्मिक संवेदना और चेतना को विशेष स्थान दिया है।
जगत नारायण कॉलेज की डॉ. मधु प्रभा सिंह ने कहा कि ‘रेणु’ प्रयोगधर्मी रचनाकार थे। उनके साहित्य में वंचितों, भूमिहीनों और स्त्रियों के जीवन का सशक्त और यथार्थ चित्रण मिलता है।
कवि मो. दानिश ने कहा कि रेणु जी ने पटना को हिंदुस्तान का साहित्यिक तीर्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संपादक सिद्धेश्वर ने ‘अज्ञेय’ पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि अज्ञेय जीवन को एक निरंतर प्रगतिशील यात्रा मानते थे। उन्होंने केवल लेखन ही नहीं किया, बल्कि हिंदी साहित्य की दिशा और दृष्टि को भी नई राह दी।
सहायक प्राध्यापक डॉ. विद्या भूषण और सहायक प्राध्यापक डॉ. अजय कुमार ने भी अपनी भावना व्यक्त की।