कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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था वो अमर बलिदानी (वीर भगत सिंह जयंती विशेष)…
बस देश के लिए जीना,
बस देश के लिए मरना
बस भगत सिंह का इंकलाब का नारा,
जग में गूंजता रहता।
बस अपनी माँ का नहीं, जग का दुलारा था वह लाडला बेटा,
एक माँ ऐसी भी थी, जो मलबा उठाकर भी मुँह को खाना खिलाई थी।
भगत सिंह की यशोदा मैया बनकर,
वह तो धन्यभाग पाई थी
वह तो ऐसा फौलाद था,
जिसका खून खौला।
जलियांवाला बाग देखकर,
उसने सोचा मेरी एक-एक बूंद खून
बस देश के काम आए,
जंग छेड़ दी उसने, वह माँ का बड़ा शेर बेटा था।
थर-थर कांपते थे अंग्रेजों के सब सरदार,
उस शेर बच्चे से
हँसते हुए जो फांसी पर चढ़ गया,
वह भगत सिंह देश का बेटा था।
अब तो बच्चा-बच्चा भारत का,
भगत सिंह जैसा बनना चाहता है।
इंकलाब का नारा आज भी
हर दिल में धड़कता है॥