दृश्य सुहाने
सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’कोटा(राजस्थान)***************************************************************** लगी नीम के ऊपर फिर सेपीली हरी निबोली,आमों के पेड़ों के ऊपरआ कोयलिया बोली।रजनीगंधा ने महका दीफिर से सूनी रातें,हँस-हँसकर कचनार कर रहासोनजुही से बातें।रस से भीगे फूल खिलाकरमहक रहा है महुआ,हरियाली की रेख खींचकरउड़ नभ में गया सुआ।चहक रही हैं चिड़िया मिलकरबाँसों के झुरमुट में,अभी देखते खो जाएँगीनीड़ों के संपुट में।लौट … Read more