बसे हो मेरी यादों में…!

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’ मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* मेरे बाबा ! हूँ तुमसे दूर जरूर फिर भी बसे हो मेरी यादों में। दिया जन्म, माँ ने जरूर पर ममता तो उड़ेली तुमने ही, पहला कदम चलना भी सिखाया था तुम्हीं ने, छुप-छुपकर मेरी बातों को सुन मन-ही-मन मुस्कुराना तुम्हारा, जब देखो मेरे ही किस्सों को दोहराना, न … Read more

बस,काम से काम रखो

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** आँखों में अक्सर अपने तूफान रखो, यहाँ सिर्फ अपने काम से काम रखो। दिल से नफरतें बाहर निकाल फेंको, तुम दिल में प्यार-मोहब्बत तमाम रखो। कोशिशें करते रहो आखिरी साँस तक, गिर कर उठना हर बार है ये जान रखो। ये मत सोचों चार लोग क्या सोचेंगें, अपनी सोच को … Read more

विश्व तुम्हारा करता वंदन

डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’  इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) ************************************************************** शाक्यवंश में जन्म लिया था, सुख से जीवन खूब जिया था वैभव पूर्ण सुखी जीवन को, क्यों तुमने धिक्कार दिया था ? यशोधरा की प्रीत को छोड़ा, राहुल पुत्र से नाता तोड़ा निकल पड़े तुम किस तलाश में, राजधर्म से क्यों मुख मोड़ा। उमड़ पड़ी थी मन में … Read more

विकास के लिये पर्यावरण की उपेक्षा कब तक ?

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* आज समग्र मनुष्य जाति पर्यावरण के बढ़ते असंतुलन से संत्रस्त है। इधर तेज रफ्तार से बढ़ती दुनिया की आबादी,तो दूसरी तरफ तीव्र गति से घट रहे प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत। समूचे प्राणि जगत के सामने अस्तित्व की सुरक्षा का महान संकट है। पिछले लम्बे समय से ऐसा महसूस किया जा रहा है … Read more

रणछोड़

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** संस्कार,मर्यादा,वचन सब उस समय स्वाह हो जाते हैं,जब सात जन्मों तक साथ निभाने वाली पत्नी छोटी से छोटी समस्या पर भी अपने माँ-बाप,भाई-बहन का साथ देने के लिए पति का साथ छोड़ देती है…. राधा रमण विवाह-विच्छेद (तलाक) की सूचना (नोटिस) को घूरते हुए सोच रहा था। … Read more

रस्में

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* रस्मों की जंजीरों से, हम सब हैं यूँ बंधे हुए। प्रीत के धागे में हों जैसे, फूल रंग-बिरंगे गुथे हुए। रस्मों-रिवाजों से समाज, आगे बढ़ता रहता है। जो करते प्रतिरोध हैं, समाज पीछे छोड़ देता है। मुहब्बत किसी रस्मो रिवाज की मोहताज नहीं। इसीलिए इसे कोई भी, मानने को … Read more

बूढ़े सपने

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* आड़ी-तिरछी रेखाओं से अटा चेहरा, केश घटाएं चांदी हो गयी, मंद पड़ गयी नयन की ज्योति, पपड़ाए होंठ सूखा हलक़ झड़ गयी अब तो, दन्त-मालिका। लुंज-पुंज ये देह हो गयी, वक़्त और जिम्मेदारियों के बीच पता ही नहीं चला, ये रूप की छांव कब ढल गयी। कब ज़िन्दगी फ़िसल गयी, … Read more

माँ जैसा कोई नहीं

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* माँ की होती शक्ति अपार, माँ करती है निस्वार्थ प्यार। बदली दुनिया माँ रही वही, सृष्टि में माँ जैसा कोई नहींll माँ होती है ईश्वर का रूप, देवी समान माँ का स्वरूप। माँ की ममता का पार नहीं, सृष्टि में माँ जैसा कोई नहींll माँ होती बच्चे की प्रथम गुरु, … Read more

अनमोल प्रण बन गये

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* रातभर जो उबलते दृगों में रहे, प्रात होते ही क्यों ओस कण बन गये। खौलते नीर की तो व्यथा है यही, न गगन ही मिले न मिले ये मही धूम्र बन-बन के उड़ता रहे वायु में, न मिले पंथ कोई दिशा में सही। पर मिले जो ठिकाना तो औषधि बने, न … Read more

मेरा गाँव

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** शहरों की अब हवा लग गई, कहां खो गया मेरा गाँव। दौड़-धूप की जिंदगी हो गई, चैन कहां अब मेरा गाँव। पढ़-लिखकर होशियार हो गये, निरक्षर नहीं है मेरा गाँव। गली-गली में नेता हो गए, पार्टी बन गया है मेरा गाँव। भूल रहे सब रिश्ते-नाते, संस्कार खो रहा … Read more