पेड़ बचाना धर्म हमारा

अमिताभ प्रियदर्शी रांची (झारखंड) ***************************************************************** लें संकल्प सभी यह प्यारा, पेड़ लगााना धर्म हमारा। सींंच हमेशा नेह नीर से, उसे बचाना कर्म हमारा। होंगे पेड़,धरा तब होगी, तभी यहाँ फसल उपजेगी। चारों ओर होगी हरियाली, और सर-सर हवा चलेगी। स्वच्छ वायु में साँस हम लेंगे। हर्षित हो कर सभी कहेंगे, पेड़ लगाना धर्म हमारा, उसे … Read more

स्वार्थ छोड़ दे मानव

अजय जैन ‘विकल्प इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* स्वार्थ छोड़ दे मानव,वरना मिट जाएगा तू, फिक्र कर जरा धरा की,वरना रोएगा तू। बर्बाद मत कर पेड़,पौधे,पर्यावरण यूँ, अपने प्राण मत और खतरे में डाल तू। जिससे सब-कुछ मिलता,मत कर उसे बंजर यूँ, ये सब मिटा तो,बदले में छाँव कहाँ से लाएगा तू। स्वार्थ की खातिर मत बन अंधा,कर … Read more

हमारी वसुंधरा

वन्दना पुणताम्बेकर इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… सम्मान करो,तुम वसुंधरा का, जिसने हमको जीवनदान दिया है। मत भूलो तुम उसके ऋण को जिसने वायु-प्राण दिया है, सम्मान करो…॥ जल रही अंगारों से वसुधा, अब इसे बचाना है, अपनी सुन्दर वसुंधरा को। फिर से हरा बनाना है, सम्मान करो…॥ इसी पावन वसुंधरा पर, … Read more

मैं धरा

विजयसिंह चौहान इन्दौर(मध्यप्रदेश) ****************************************************** एक लंबे समय से मैं धरा तुम सब जीव-जंतु,प्रकृति,पर्यावरण को अपने में समाहित किए मजे से जी रही हूँ। प्यारे-प्यारे मनुष्य,सुंदर फल-फूल,कल-कल संगीत सुनाती नदियां,विशाल पठार और कोमल दूब क्या नहीं संजोया मैंने अपने दामन में,सिर्फ तुम्हारे लिए! सोना-चांदी,कोयला-कथीर,खट्टे-मीठे और कड़वा स्वाद तक समेटा है,मैंने अपनी बगिया में। तुमने जैसा बीज … Read more

रचना पाठ के साथ पुस्तक लोकार्पित

इंदौर। २० अप्रैल शनिवार को देवी अहिल्या केन्द्रीय पुस्तकालय में जनवादी लेखक संघ के मासिक रचना पाठ के ६६ वें क्रम में सिंधी के वरिष्ठ कवि चुन्नीलाल वाधवानी की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘रंडा रोड़या जन’ का लोकार्पण किया गया,जिसमें उनके १०४० तन्हा (एक पंक्ति की कविता) हैं। इस मौके पर आपने चुनिंदा तन्हा … Read more

धरती से है इंसान

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… धरती अपनी धारिणी,माता रूप समान। करो वन्दना प्रेम से,इनसे हैं इंसान॥ इनमें हैं सारा जहां,सारा हिंदुस्तान। तिलक लगा माथा इसे,चन्दन बने महान॥ माता मेरी ये धरा,हरियाली चहुँओर। सूरज करते भोर हैं,पक्षी करते शोर॥ वीरों की क़ुर्बानियाँ,इसी धरा की शान। भारत के बेटा सभी,करते … Read more

बेजान पत्थर

मनोज कुमार सामरिया ‘मनु’ जयपुर(राजस्थान) *************************************** ना मन्दिरों में महफूज है, ना मस्जिदों में सलामत है। कलियों के खिलने पर अब, बागों-बगीचों में भी बगावत है। अब तलक यकीं था कि, बसता है तू कहीं पत्थर की मूरत में तू रहनुमाँ है कहीं कुरान की सूरत में… पर भोला था मैं जो, यकीं कर बैठा … Read more

सुहाना पागलपन

मदन मोहन शर्मा ‘सजल’  कोटा(राजस्थान) **************************************************************** वह निहारती है तो मैं नजरें झुका लेता हूँ, वह हया के परदे में सिमट जाती है जब मैं उसे एकटक देखता हूँ, शबनम-सी लरजती अंतर्मन से प्रस्फुटित होती, भावनाओं का कोमल स्पर्श मदहोश करती अभिलाषा, आँखों से नूर बनकर टप-टप टपकती है, पर खामोश। थरथराते हैं होंठ करने लगता … Read more

ममतामयी ऐसी मेरी वसुंधरा

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… जिसका आँचल है रत्नों से भरा, ममतामयी ऐसी मेरी वसुंधरा। ऋण तेरा कैसे चुकायेंगे हम, सौंदर्य वरदान है तुमने दिया। नियम क्या तेरा सदा अपनाएंगे, तभी तो रहता जीवन दुःखों भराl ममतामयी ऐसी मेरी…ll सहनशीलता धरती माँ तेरी महा, वक्ष रहता सदा फूल शूलों से … Read more

वो मिले कहीं तो कहना बात बेचता हूँ…

दीपेश पालीवाल ‘गूगल’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************** घूम-घूम नगर-नगर अपनी हसीं रात बेचता हूँ, और वो मिले कहीं तो कहना,बात बेचता हूँ। अगर भुखमरी है देश में रहने दो,मुझे इन सबसे क्या, मैं तो घूम-घूम मन्दिर-मस्जिद अपनी जात बेचता हूँ। वो मिले कहीं तो कहना,बात बेचता हूँ… वो क्या सोचते हैं बारे में मेरे,मुझे इसकी परवाह … Read more