मन्नतों के धागे

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* मन्नतों के अनगिनत धागे मैंने बांध दिए…।रात के बाद प्रातः सूरज ने फिर सवाल किए॥ बादलों पर चित्र उकेरे और दिया संदेशा,आयेगा जवाब कोई मन में था अंदेशा।उम्मीद नाकाम हो रही उदास जिंदगी जिये।रात के बाद…॥ कितनी कही-अनकही बातों की साथ थी सरगम,यादों की अनगिनत लड़ियां भी साथ थी हरदम।खोज में ही … Read more

हे! बापू तुमने…

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************* दोहे लिक्खूँ गाँधी तुझ पर,या रच दूँ मैं गीत।गाँधी बाबा तुम सचमुच थे,जन्मों के मनमीत॥ बिलख रही जब भारत माता,तुमने फर्ज़ निभाया।मार फिरंगी को लाठी से,तुमने दूर भगाया॥तुम में देशभाव व्यापक था,निभा गए तुम प्रीत।गाँधी बाबा तुम सचमुच थे,जन्मों के मनमीत…॥ अत्याचारों की आँधी को,तुमने बढ़कर रोका।सत्य,अहिंसा के नारों से,दुश्मन … Read more

अजर-अमर विभूति

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ दो अक्टूबर लाया भू पर,दो विभूतियां अजर-अमर।गूंजे नभ भूतल दोनों के,मिल कर विजय घोष के स्वर॥ किसके थे अवतार उभय गुरु,हमको अब भी ग्यात नहींकिन्तु अभी तक इस दिन जैसा,उर्मिल हुआ प्रभात नहीं।जन्म दिवस था या पृथ्वी पर,आये थे दो देव उतर॥ प्रथम पूज्य बापू ने आकर,दी जगती को दृष्टि नईकी मानव के … Read more

लावारिस

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************* मैं हूँ लावारिस क्या मेरा,पैदा होना या मर जाना।सड़कों पर जीवन बीतेगा,ना मुझे किसी के घर जाना॥ नहीं कोई ऋतु वसंत यहाँ,सर पर है नभ की छत नीली।अंतड़िया भूखी सिकुड़ गयी,आँखों की पुतली है पीली॥ना जानू मैं क्यों आया हूँ,है कौन मुझे लाने वाला।आँधी से लोरी सुनता हूँ,लगती सूखी-सी या गीली॥कूड़े-करकट … Read more

अद्भुत समर्पण

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ धरती के भीतर से देख लिया प्रस्तर ने,छिप कर झरोखे से मेरा मृदु आननरंग को निखार वह,रूप को सँवार सखी,आया द्रुत सम्मुख बन मेरा लघु दर्पण। मैंने तो सोचा था मेरी छवि लखने को,मेरी ही अँखियाँ नित रहती अभिलाषी हैंलेकिन जब देखा छू शीशे के अन्तर को,समझी तब मेरे ही दर्पण प्रत्यासी हैं।दर्पण … Read more

है गर्व हमें

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** भारत की आत्मा ‘हिंदी’ व हमारी दिनचर्या…. भारत की आत्मा है हिन्दी,व हमारी दिनचर्या भी यही,…………………है गर्व हमें।………………………. जन्मे भारत की माटी पर,भाषा सबसे प्यारी है यही,………………..है गर्व हमें॥……………………….भारत की आत्मा है हिन्दी… है ओम शब्द हिन्दी का ही,जो सूरज दिन भर कहता है।चन्दा भी हर पूर्णमासी में,अपनी किरणें … Read more

अपने

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** भुला कर बैर सबका साथ में रहना जरूरी है,कहा है सच बुजुर्गों ने जुड़े रहना जरूरी है।जो पत्ता डाल से टूटे वो जोड़ा नहीं सकता,उजाला घर में चाहे घर का दीपक भी जरूरी है।अगर परिवार है संग में अकेला क्यों रहें बोलो,अलग अपनों से रह कर ज़िन्दगी रहती अधूरी है॥ रहे … Read more

हिंदी हिंदुस्तान

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************** भारत की आत्मा ‘हिंदी’ व हमारी दिनचर्या…. रचना शिल्प:मात्रा भार १६/१३/ हिन्द देश के हैं हम वासी,हिंदी मेरी जान है।तन-मन सब-कुछ वार दिया है,इस पर जां कुर्बान है॥ नमः मातरम् नमः मातरम्,धरती का यह राग है।भारतवासी बेटे हैं हम,सबकी यही जुबान है॥हिन्द देश के हैं हम… अंग्रेजी पढ़ लेना तुम … Read more

यह संभव नहीं है

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************* मान लें कठिनाइयों से हार यह संभव नहीं है।रोग ‘कोरोना’ करे लाचार यह संभव नहीं है॥ मौत देखो आँख से काजल चुराती घूमती है,नित नई कोशिश हमारी जिंदगी को चूमती है।साँस अब भी चल रही है,दीपकों-सी बल रही है,छोड़ दें हम हाथ से तलवार यह संभव नहीं है॥मान लें कठिनाइयों से … Read more

अहंकार का वृक्ष

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* अहंकार का वृक्ष लगाकर,सींचा उसको शान से।विपत काल में छोड़ गए सब,तेरे निज अभिमान से॥ व्यर्थ दिखावें पर जीवन को,रखकर दिन को काटता,उच्च वस्तुओं का दम भरकर,रिश्तों को भी छाँटता।आज वक्त ने छीन लिया सब,अल्प समझ अरु ज्ञान से,अहंकार का वृक्ष लगाकर,सींचा उसको शान से…॥ टहनियों में द्वेष भर गया,पनप गई … Read more