गर रात नहीं हो इस जग में
ओम अग्रवाल ‘बबुआ’मुंबई(महाराष्ट्र)*********************************************** कल रात अंधेरा घना था लेकिन,भोर की आशा बाकी थी।जगे हुए इन नयनों में भी,कुछ जिज्ञासा बाकी थी॥ अंधियारे जब सृजित हुए तो,कुछ तो अर्थ रहे होंगे,या कुदरत की झोली में भी,कुछ पल व्यर्थ रहे होंगे।आखिर मैंने पूछा प्रभुवर,एक बात बतलाओ तो,काले गहन अंधेरों का कुछ,राज जरा समझाओ तो। क्यूँ निर्माण किया … Read more