उड़ जाने को जी करता है
शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)*********************************************** सपनों वाले पंखों से फिर,उड़ जाने को जी करता है।बचपन के उन गलियारों में,मंडराने को जी करता है॥ थका-थका लगता मेरा मन,है बोझिल-बोझिल सा जीवन।याद आ रहा है मुझको अब,हरा-भरा वो घर का आँगन॥गाँवों की प्यारी चौपालें,झुकी हुईं वो तरु की डालें।उन डालों पर बैठे-बैठे,फल खाने को जी करता है॥ आते … Read more