गर रात नहीं हो इस जग में

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’मुंबई(महाराष्ट्र)*********************************************** कल रात अंधेरा घना था लेकिन,भोर की आशा बाकी थी।जगे हुए इन नयनों में भी,कुछ जिज्ञासा बाकी थी॥ अंधियारे जब सृजित हुए तो,कुछ तो अर्थ रहे होंगे,या कुदरत की झोली में भी,कुछ पल व्यर्थ रहे होंगे।आखिर मैंने पूछा प्रभुवर,एक बात बतलाओ तो,काले गहन अंधेरों का कुछ,राज जरा समझाओ तो। क्यूँ निर्माण किया … Read more

सच्ची दीवाली

आशा आजादकोरबा (छत्तीसगढ़) ********************************************** जिस दिन अंत:तमस मिटेगा,समझो सच्ची दीवाली।मानवता का भाव जगेगा,हृदय नही होगा खाली॥ दीन-दुखी की सेवा करते,समझो मन उनका सच्चा।लोभ मोह में फँसा रहे जो,उसका मन जानो कच्चा।प्रति पल मानुष हँसकर बैठे,प्रेम भाव की हो डाली।जिस दिन अंतः तमस मिटेगा,समझो सच्ची दीवाली…॥ फुलझड़ियाँ-सा रौशन कर दें,समता जग में फैलाये।मीठे पकवानों-सा रसमय,मधुर गीत … Read more

दीपों का त्योहार मना लें

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************** दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष….. दीपों का त्योहार मना लें,मिल-जुल के सब दीप जला लें।देवी लक्ष्मी माता सुखों की,दे आशीष वो श्रद्धा जगा लेंlदीपों का त्योहार…ll धनतेरस और दीवाली में,जीवन के अंधियारे मिटते।सीताराम अयोध्या लौटे,मानवता को विजय दिला के।कोई दीन-दुखी ना छूटे,हर मन खुश हो दीवाली में।दीपों का त्योहार मना … Read more

तमसो मा ज्योतिर्गमय

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ****************************************************** दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष….. दीपोत्सव पावन बेला यह,आओ विजयी दीप जलाएँ।चलो मिटाएँ अन्धकार जग,मुस्कान अधर खुशियाँ लाएँll संकल्प चित्त आश्वस्त ध्येय,जगमग-जगमग दीप जलाएँ।नवप्रकाश हम नवप्रभात बन,नव अरुणिम नव आश जगाएँ।तमसो मा ज्योतिर्गमय गाएँ। अवसादन बन महाव्याधि जग,घनघोर घटा बन जग छाये।आओ मिलकर एक भाव मन,सुखद शान्ति का दीप जलाएँ।तमसो … Read more

आई दिवाली

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ************************************************ घर-बाहर है साफ-सफाई,करते हैं सब लोग।हर्ष भरा उत्साह सभी में,करें सभी मनमोद॥ बम-पटाखे-फुलझड़ियों से,जगमग चारों ओर।दीप-दीप मालाओं से हर-घर है भावविभोर॥ जगमग लड़ियों से घर-आँगन,रात अंधेरी में भी।खुशी से झूमें सभी लोग,उजियारी सब जग फैली॥ आएंगे रघुनंदन वन से,आज खुशी में गायें।जाग दिवाली जाग दिवाली,कहकर मोद मनायें॥ लक्ष्मी घर-घर आज सभी … Read more

प्रियतम बिन सूना यह सावन

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’मुंबई(महाराष्ट्र)*********************************************** जब पूनम का चँदा देखूँ,मैं दरिया के पानी में।जैसे प्रियतम ने छेड़ा हो,मुझको भरी जवानी मेंllप्रियतम बिन सूना यह सावन,अब तो प्रियतम आ जाओ,तन-मन मचल रहा है मेरा,कुछ तो आन लजा जाओll माथे की बिंदिया बुला रही है,काजल की आवाज सुनो,गजरा झुमकी कंगन नथनी,इनके भी तो साज सुनो।बिन खुशबू-सी बगिया अपनी,आकर तुम … Read more

हे लाल तुम्हारा अभिनन्दन है

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’मुंबई(महाराष्ट्र)*********************************************** जिनकी खातिर व्यक्ति नहीं ये,देश समूचा अपना है।जिन आँखों में भारत माँ की,माटी का ही सपना है॥ वतन परस्ती में छोड़ा है,अपने घर परिवारों को,जो जीवन में भूल गए हैं,मौसम और बहारों को।शोणित का जो तिलक लगाते,माटी जिनका चंदन है,रण के प्रण से बंधे हुए हे लाल तुम्हारा अभिनन्दन है॥ तुमने माँ … Read more

हे! कलियुग के राम

डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’ इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) ************************************************* हे! कलियुग के राम आज,जग में अवतारो।मन के भीतर छिपे घोर,रावण को मारोllगाँव-नगर में बजे नहीं,रावण का डंका।करो लक्ष्य संधान हनू,अब लंका बारोllहे! कलियुग के राम… सोने के मृग घर-बाहर,सब घूम रहे हैं,सीताओं की देह गंध,को सूंघ रहे हैं।लक्षित रेखाएं खींचों,तुम अपनी सीता,क़दम न रावण रख पाये,उसको संहारोllहे! कलियुग … Read more

वो चिठ्ठी-पत्री वाला प्यार

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************************** वो होती थी बैरन रात,रात,लिखती थी मन की बातlबात-बात में करती थी इज़हार,वो चिठ्ठी-पत्री वाला प्यारll बार-बार कागज को फाड़,फाड़,लिखती थी सौ-सौ बारlबार,आने की करती मनुहार,वो चिठ्ठी-पत्री वाला प्यार…ll उसमें बसती थी आस,आस,प्यास,दिल की साँसlसाँस,इन अँसुअन की धार,वो चिठ्ठी-पत्री वाला प्यार…ll सीने से लगा घबराती,घबराती,डाकिए को दे पातीlपाती,सबसे लगता था डार,वो … Read more

तुम दीप जलाना

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)*************************************************** (रचना शिल्प:१६/१२,सार छंद) दीपों से तुम दीप जलाना,मन में प्यार जगाना।घर-आँगन महके हर कोना,ऐसा पुष्प खिलाना॥ दूर हटे अँधियारा जग से,फैले ज्ञान उजाला।कर्म साधना हो नित ऐसा,सदा मिले गल माला॥जगमग मन मन्दिर को करना,हँसना और हँसाना।घर-आँगन महके हर कोना… प्रेम जगत में सबसे करना,कोई नहीं पराया।मानव जीवन मोल समझना,कुछ दिन … Read more