स्वार्थ से टूट रहे परिवार
शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)***************************************** बदल गई संकल्पना,रूठ गया ‘शिव’ प्यार।एकल जब से हो गये,अपने घर परिवार॥ संस्कार और सभ्यता,गई घरों से रूठ।कौटुंबिक तरुवर हुआ,मानो कोई ठूँठ॥ सम्बन्धों में आजकल,नहीं रह गया प्यार।कलह कपट अरु स्वार्थ से,टूट रहे परिवार॥ संस्कार और मूल्य का,उद्गम है परिवार।भावों की सुरसरि बहे,बरसे स्नेह अपार॥ ‘शिव’ संबंधों में कहाँ,दिखता निश्छल प्यार।वैमनस्य … Read more