पिता की व्यथा
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ***************************************** पिता कह रहा है सुनो,पीर,दर्द की बात।जीवन उसका फर्ज़ है,नहिं कोई सौगात॥ संतति के प्रति कर्म कर,रचता नव परिवेश।धन-अर्जन का लक्ष्य ले,सहता अनगिन क्लेश॥ चाहत यह ऊँची उठे,उसकी हर संतान।पिता त्याग का नाम है,भावुकता का मान॥ निर्धन पितु भी चाहता,सुख पाए औलाद।वह ही घर की पौध को,हवा,नीर अरु खाद॥ भूखा … Read more