आया नया सवेरा

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) *********************************************************************** नया सवेरा आ गया,सबको करूँ प्रणाम।हम मिलजुल करके करें,पूरा हो सब काम॥ फूल खिले हैं बाग में,भौरें भी मँडराय।नया सबेरा छा गया,पंछी गाना गाय॥ निकला सूरज भोर में,सारा जग चमकाय।कल-कल कर नदियाँ बहे,झरने भी लहराय॥ हँस रही है वसुंधरा,पत्ते शोर मचाय।तितली उड़ती जा रही,बागों पर इठलाय॥ कोयल कूके पेड़ … Read more

किसानों की पीड़ा

आशा आजादकोरबा (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** इस धरती पर देव है,अपने सभी किसान। उपजाते हैं अन्न को,सबके ये भगवान॥ आज दुर्दशा देख लें,नित्य बहाते नीर, आय नहीं है क्या करें,कितना सहते पीर, कठिन तपस्या ये करे,होता बचत न धान, इस धरती पर देव हैं,अपने सभी किसान। फसल मेहनत से उगे,मिलता उचित न मोल, लाभ कहाँ से होय … Read more

मधुशाला सज महफ़िलें

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************************************** गज़ब नीति सरकार की,कर मदिरा व्यापार।विकट आपदा है वतन,जनता है लाचार॥ मधुशाला फिर से सजी,नशाबाज गुलज़ार।गज़ब रोग उपचार यह,भाग रहे बेकार॥ बाँट रहा जग दुआ वह,जिसे स्वयं दरकार।भूली जनता जाम ले,आमद में सरकार॥ अंगराज शरमा रहा,मधु दान को देख।‘कोरोना’ शकुनी करे,नाश मनुज अभिलेख॥ खाने के लाले पड़े,मचा पलायन देश।मधुशाला … Read more

विपदा में आनंद

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ********************************************************************** (रचना शिल्प:ध्रुव पंक्ति-आज समय जो भी मिला,ले उसका आनंद)‘कोरोना’ के काल में,सभी घरों में बंद।आज समय जो भी मिला,ले उसका आनंद॥ गृह में ही रखी हुई,जो भी होय किताब।बड़े प्रेम से मनन करि,ज्ञान का लें आनंद॥ बच्चों के संग खेल लें,लूडो,सीढ़ी साँप।शतरंजी के खेल में,रहें सदा आनंद॥ छोटे बच्चे हों अगर,खेलें … Read more

घुटती साँसें

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** विश्व पर्यावरण दिवस ५ जून विशेष……. बिगड़ा है पर्यावरण,बढ़ता जाता ताप!ज़हरीली सारी हवा,कैसा यह अभिशाप!! डीजल,गैसें खप रहे,बिजली जलती ख़ूब!हरियाली नित रो रही,सूख गई सब दूब!! यंत्रों ने दूषित किया,मौसम और समाज!हमने की है मूर्खता,हम ही भुगतें आज!! नगर घिर गये धुंध में,धूमिल सारे गाँव!धुंआ-धुंआ जीवन हुआ,गायब सारी छाँव!! दिखती … Read more

नया सवेरा

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़ ************************************************** नया सवेरा आ गया,जाग उठो इंसान।स्वागत कर लो भोर का,नहीं बनो शैतानll खिल गई है बाग में,कलियाँ चारों ओर।चिड़िया चहके नीड़ में,मचा रही है शोरll टन टन घंटी बज रही,मंदिर जाते लोग।पूजा करते प्रेम से,लेकर छप्पन भोगll कोरोना अब दूर हो,माँगे सब वरदान।संकट सबके टाल दो,दया करो भगवानll माटी को … Read more

मजदूर

सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’कोटा(राजस्थान)***************************************************************** निर्धन युवकों ने कभी,जो छोड़ा था गाँव।मजबूरी में चल पड़े,उसी ओर अब पाँव॥ शहरों में जीवन खपा,लगा न कुछ भी हाथ।सिर पर जब विपदा पड़ी,छोड़ा सबने साथ॥ आ आफत ने खोल दी,बड़ों-बड़ों की पोल।साथ निभाने के सभी,झूठे निकले बोल॥ बंद हुए उद्योग तो,लौट चले मजदूर।आँख फेर पल में हुए,मालिक उनसे दूर॥ अपनी … Read more

मन वाणी भावेश हो

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************************************** निर्मोही बनना नहीं,होय सरल व्यवहार।मिले तभी सम्मान है,अपना सब संसारll विद्रोही जो देश के,होते हैं गद्दार।ऐसे मानव को सदा,मिलती है फटकारll आरोही क्रम हो सदा,बने प्रगति की राह।पूरी होती फिर सभी,सोची जो भी चाहll स्नेह सभी से कीजिये,बैर भाव को त्याग।भाई चारा मन बसे,हो सबसे अनुरागll मन वाणी भावेश हो,रखना … Read more

अनंत

मनोरमा चन्द्रारायपुर(छत्तीसगढ़)******************************************************** इष्ट नाम को जाप लो,उनकी कृपा अनंत।प्रभु का सुमिरन नित करो,होता दु:ख का अंत॥ इच्छा कितनी है प्रबल,मन भागे चहुँ ओर।नित अनंत कुछ चाह का,करे जगत में शोर॥ श्रेष्ठ कर्म के ताप से,जगत मिले हैं मान।मन अनंत प्रहसित हुआ,ऐसा होता भान॥ मात पिता का प्रेम तो,है अनंत तू जान।सारे जीवन कर भरण,बसे पूत … Read more

बेबसी भाईचारे की

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************************************************** भाईचारा शब्द यह,बहुत सुखद संदेश। खोज़ रहे बस जग धरा,यहाँ वहाँ परिवेशll उपदेशक हैं बहु यहाँ,धर्म जाति सम्भाव। नेता साधु मौलवी,लूट रहे दे घावll अपनापन पाएँ कहाँ,स्वार्थ छली संसार। झूठ लूट धोखाधड़ी,करते अत्याचारll भाषा क्षेत्रिय जाति नित,धर्म नाम पर द्रोह। हिंसा रत नफ़रत यहाँ,प्रीति मोल अवरोहll शर्मसार अल्फ़ाज यह,भाईचारा … Read more