सेहत की बदहाली बताती सच्चाई

ललित गर्गदिल्ली************************************** संयुक्त राष्ट्र की एक रपट में यह जानकारी दी गई है कि, प्रसव एवं उसके पश्चात जच्चा-बच्चा की मौतों के मामले में जिन देशों की स्थिति बहुत नकारात्मक पाई गई है, उसमें भारत की तस्वीर सबसे खराब है। भारत में प्रसव के दौरान महिलाओं, मृत शिशुओं के जन्म और नवजात शिशुओं की मौत … Read more

हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के अभियान के सेनानी ‘माधव राव सप्रे’

राजेश बादलदिल्ली************************ आज़ादी से पहले हिंदी और हिंदी पत्रकारिता के विकास में ग़ैर हिंदीभाषियों का योगदान अदभुत और अविस्मरणीय है। इनमें महात्मा गाँधी, कन्हैया लाल मानक लाल मुंशी, सी. राजगोपालाचारी, प्रेमचंद और सरदार भगत सिंह जैसे कई नाम हैं, लेकिन माधवराव सप्रे का नाम इन सबसे ऊपर है। उस ग़ुलाम हिन्दुस्तान में उन्होंने कलम और … Read more

सम्पन्नता

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** विश्व परिवार दिवस (१६ मई) विशेष… पोरवाल परिवार के गृह प्रवेश के आयोजन में शहर के लगभग सभी प्रतिष्ठित परिवार आए। उस कोठीनुमा घर या यूँ कहें कि, उस आधुनिक महल की सुंदरता का बखान बढ़-चढ़कर हो रहा था।“पोरवाल जी, आपको इस मुकाम पर देखकर बहुत खुशी हो रही … Read more

हिंदी जगत के उद्भट चिंतक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** जन्म जयंती-१५ मई विशेष… आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी (१८६४-१९३८) हिन्दी के महान साहित्यकार, पत्रकार एवं युगप्रवर्तक थे। उन्होंने हिंदी साहित्य की अविस्मरणीय सेवा की और अपने युग की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को दिशा एवं दृष्टि प्रदान की। उनके इस अतुलनीय योगदान के कारण आधुनिक हिंदी साहित्य का दूसरा युग ‘द्विवेदी युग’ (१९००-१९२०) … Read more

जननी बिन जीवन निरर्थक

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** माँ बिन…! ‘आती है तो आए पथ में सौ बाधाएं,तू मेरे माथे पर माँ, आशीर्वाद का टीका है।’माँ का आशीर्वाद और पिता का प्यार जिसके साथ है, वह संसार का सबसे धनवान व्यक्ति है। जब से संयुक्त परिवार घटता गया, तब से एक-दूसरे के प्रति भावनात्मक रिश्ते कम होते गए। आधुनिकीकरण … Read more

माँ सर्वोपरि

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)********************************************* माँ बिन…! दुनिया में ऐसा कोई बिरला ही होगा, जो अपनी जननी को नमन न करता हो। कारण भी स्पष्ट है अर्थात बिना माँ के वह इस इहलोक में पदार्पण कर ही नहीं सकता है।माँ काली हो, कुरुप हो, दिव्यांग हो या खूबसूरत, कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि माँ का दूध … Read more

त्याग-प्रेम की पराकाष्ठा ‘माँ’

ललित गर्गदिल्ली************************************** माँ बिन…! ‘मातृ दिवस’ का मतलब होता है माँ का दिन। पूरी दुनिया में मई माह के दूसरे रविवार को ‘मातृ दिवस’ मनाया जाता है। मातृ दिवस मनाने की शुरुआत सर्वप्रथम ग्रीस देश में हुई थी, जहां देवताओं की माँ को पूजने का चलन शुरु हुआ था। इसे मनाने का प्रमुख उद्देश्य माँ … Read more

सनातन संस्कृति के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं ‘शिखा’ एवं ‘यज्ञोपवीत’

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** सनातन संस्कृति के २ महत्वपूर्ण प्रतीक माने जाते हैं, एक ‘यज्ञोपवीत’ और दूसरी ‘शिखा।’वास्तव में सनातन संस्कृति के हर छोटे-बड़े प्रतीक या हर छोटी-बड़ी बातें अत्यन्त महत्वपूर्ण और उपयोगी हैं, इन्हे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी परखा जा चुका है। सनातनी पद्धति में १६ संस्कार माने जाते हैं उनमें से यज्ञोपवीत अति महत्वूर्ण … Read more

रोगी के लिए देवदूत नर्स

ललित गर्गदिल्ली************************************** अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस (१२ मई)विशेष… एक चिकित्सक और रोगी के बीच में सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए एक नर्स उसे स्वस्थ ही नहीं करती, बल्कि तमाम तरह की असुविधाओं में रहकर, खुद को अपने परिवार से अलग रखकर, निरन्तर अपनी सेवाएं देती है। यह करते हुए वे कोई शिकायत नहीं करती एवं आशा … Read more

बच्चों हेतु स्मार्टफोन कितना जरूरी ?

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** सरोकार… कभी-कभी यह विचार आता है कि, आज से ५० साल पहले हमारे जमाने में टी.वी, मोबाइल या इस तरह के सामाजिक सन्देश (सोशल मीडिया) का चलन होता तो, क्या हम इतने पढ़ लिखकर जो आज बने हैं, वह बन पाते ! हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जैसे उस समय इतनी … Read more