जीवन रंग कवियों के संग

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* जीवन और रंग… रंगों से जीवन आकर्षक दिखाई देता है। जीवन में कोई रंग हल्का है, कोई रंग चटकीला। कोई मध्यम रंग है, कोई रंगहीन श्वेत या कृष्ण रंग। यानि मानव जीवन प्रत्येक रंग से सुसज्जित है अपना-अपना सुख-दु:ख लिए। जीवन है तो संघर्ष रंग भी होगा ही। जीवन संघर्षों से … Read more

सर्वत्र अनैतिकता, राष्ट्रीय चरित्र कैसे बने ?

ललित गर्गदिल्ली************************************** किसी वकील, चिकित्सक या राजनेता को ढूंढना कठिन नहीं, जो अपने विषय के विशेषज्ञ हों और ख्याति प्राप्त हों, पर ऐसे मनुष्य को खोज पाना कठिन है जो वकील या राजनेता से पहले मनुष्य हो, नैतिक हो, ईमानदार हो, विश्वस्त हो, पर राष्ट्र केवल व्यवस्था से ही नहीं जी सकता। उसका सिद्धांत पक्ष … Read more

हमारा भी एक सत्र

hindi-bhashaa

फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन.. भाग-९ ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ में फिजी जाने का सौभाग्य वक्ता के रूप में मिला, यह मेरे जैसे बालक के लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय रहा। मुझ जिस सत्र में सहभागिता करना थी, उसकी अध्यक्षता अरुण भगत जी ने की (जो वर्धा विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के विभागाध्यक्ष रहे और वर्तमान में बिहार … Read more

आआपा:भाजपा का बड़ा सिरदर्द

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* दिल्ली राज्य के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली के शराब-विक्रेताओं से लगभग १०० करोड़ रु. खाए हैं। भ्रष्टाचार के आरोप में आप पार्टी के वित्तमंत्री सत्येन्द्र जैन पिछले कई महीनों से जेल काट रहे हैं। सिसोदिया पर भ्रष्टाचार के आरोप की … Read more

रक्त की कीमत

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन(हिमाचल प्रदेश)************************************** जुम्मन मियां की गिनती शहर के बड़े रईसों में होती थी। बड़ा कारोबार है उनका। समाज में अच्छा नाम है, रूतबा है, पर उनकी एक ही कमी थी कि वो अपनी कौम से ज्यादा प्यार करते थे, अन्य समुदायों को वह नीचा समझते थे। किसी से भी वह उचित व्यवहार … Read more

हिन्दी:जनता और प्रशासक राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकारें

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मागधी अर्द्ध मागधी प्राकृत संस्कृत से निर्मित ग्यारह सौ वर्षों के वृहद काल में नवांकुरित नवपल्लवित, पुष्पित और सुरभित फलित हिन्दी भाषा और साहित्य आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल, आधुनिक काल और अर्वाचीन काल में प्रसूत पालित पोषित सम्वर्द्धित होती हुई राजभाषा हिंदी आज विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली तृतीय … Read more

मानसिक संतुलन के लिए शिक्षा में परिवर्तन आवश्यक

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** इंसान अपना मानसिक संतुलन इस कदर क्यों खो रहा है कि, छोटी-छोटी बात पर हत्या तक को अंजाम दे देता है। इसका सबसे पहला कारण कि, आजकल संयुक्त परिवारों का चलन खत्म हो रहा है। एकल परिवारों का चलन बढ़ गया है। दादा- दादी के संरक्षण में खून-खराबे जैसी घटनाएं नहीं होती … Read more

यूक्रेन:भारत की भूमिका हो सकती है बेजोड़

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की यूक्रेन-यात्रा ने सारी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया है। वैसे पहले भी कई अमेरिकी राष्ट्रपति ईराक और अफगानिस्तान में गए हैं, लेकिन उस समय तक इन देशों में अमेरिकी फौजों का वर्चस्व कायम हो चुका था, पर यूक्रेन में न तो अमेरिकी फौजें हैं और न ही … Read more

विश्वगुरु बनने का सुन्दर प्रयास !

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** वैसे हमारा देश लापरवाहियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कोई भी काम नियमानुसार होना, करना कठिन और असंभव है। हमारे यहाँ भाषण में बहुत-कुछ नैतिकता की बातें बोली और बताई जाती हैं, पर वास्तविक धरातल में सच्चाई अलग होती है। अमृत काल के समय यानी ७५ वर्ष स्वतंत्र हुए देश में और नैतिक … Read more

मुफ्त की बजाय गरीबों का आर्थिक स्वावलम्बन जरूरी

ललित गर्गदिल्ली************************************** आजादी के अमृत काल में सशक्त भारत एवं विकसित भारत को निर्मित करते हुए गरीबमुक्त भारत के संकल्प को भी आकार देना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनकी सरकार ने वर्ष २०४७ के आजादी के शताब्दी समारोह के लिए जो योजनाएं एवं लक्ष्य तय किए हैं, उनमें गरीबी उन्मूलन के लिए भी व्यापक … Read more