जुबान पर चढ़ जाती है छंदयुक्त कविता -डॉ. शर्मा
आनलाइन दोहा एवं घनाक्षरी कार्यशाला उज्जैन(मप्र)। कविता में यदि छंद का समावेश हो तो वह पाठकों और श्रोताओं द्वारा लम्बे समय तक याद रखी जाती है। हमारी वाचिक परम्परा के गीत और काव्य इसी प्रकार के हैं। मध्यकालीन सन्तों और कवियों की रचनाएँ आज भी कंठानुकंठ जीवित हैं। दूसरी ओर छंदहीन रचना के भाव ही … Read more