मौत जिंदगी से मरती है

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************************************* शायद यह सही कहा है,किसी गरीब के दिल ने यंहा मौत मंहगी है और जिंदगी सस्ती होती है, गगनचुंबी आलीशान,अट्टालिकायें खड़ी है जहां उनके पीछे गरीबों और अभागों की एक बस्ती है। ना तो अपनी खुशी से खुश हैं,यहां ये पैसे वाले ना ही गरीबी से दु:खी हैं यहां,ये किस्मत … Read more

उत्सव मनाइए

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** होली पर्व रंग संग, मना लेवें भीगे तन, हर मन खुशी छायी, उत्सव मनाइये। मिल-जुल सब संग, उमंगित हो मगन, अवगुण का समन, सभी कर जाइये। लग जाये जब रंग, अबीर गुलाल संग, रंग पिचकारी तन, मत घबराईये। भाईचारे का त्योहार, आनंद छाये अपार, मतभेद त्याग कर, गले मिल जाइये। परिचय-श्रीमति … Read more

मैं पतझड़ का फूल

मनीषा मेवाड़ा ‘मनीषा मानस’ इन्दौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************************** नहीं किसी बाग की शोभा, नहीं कोई माली मेरा। निर्जन वन में पड़ा अकेला, ‘मैं पतझड़ का फूल’ विरह अग्नि पल-पल जलता, फिर भी रोज खिला हूँ करता। धू-धूकर जलती है धरती, हवा भी वही रूप धर लेती। सुनकर सूखे पत्तों के सुर-साज, मिटाता हूँ इस मन के त्रास। … Read more

तू है ना

देवेन्द्र कुमार शर्मा ‘युगप्रीत’ अजमेर(राजस्थान) ************************************************************************ सवाल कैसा भी हो,हल हो ही जाता है, तू है ना तो सब हो ही जाता है। इतना भी नही अदीब मैं,कि सब जान सकूँ, गिर्द में तेरे आने पर अफसोस मिट सा जाता है। तू है ना तो सब हो ही जाता है…ll गमगुस्सार जितने थे सब चले … Read more

देश की खातिर…

शरद जोशी ‘शलभ’ धार (मध्यप्रदेश) **************************************************************************** देश की खा़तिर जिएँ हम,देश की ख़ातिर मरें, देश का गौरव बढे़ सब,काम हम ऐसे करें। आपसी मतभेद सारे,जो भी हैं हम भूल जाएँ, एक होकर हम सभी,इस राष्ट्र के ही गीत गाएँ। एकता हो देश में सब,काम हम ऐसे करें, देश की ख़ातिर…॥ जाति का अभिमान हो नहीं,रंग … Read more

बिखरे रंग

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* इस होली पर हमने देखे सबके कैसे कैसे रंग। कुछ माथे,कुछ चेहरे पे चढ़े और कुछ घूमे वस्त्रों के संग। भर पिचकारी मारें बच्चे जिनमें घोले कई हैं रंग। अबीर गुलाल जो बिखरे हैं वो मुस्काते बच्चों के संग। छाप छोड़ गए घर-आँगन में अबकी जो होली के रंग। … Read more

सागर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** मैं सागर हूँ महार्णव अति गह्वरित, धरा के आँचल में समेटे स्वयं को या यों समझ माँ की आबरू को ढँक तीनों दिशा दुर्दांतकों से अनवरत, हूँ मैं तोयनिधि संरक्षक जलधि प्रकृति चराचर जगत् पालक, देव-दानव-मानव जलचर सभी हेतु हूँ जलज का व्योम का, वड़वानल और करुणार्द्र साथ … Read more

मेरा देश

  डॉ.स्नेह ठाकुर कनाडा ******************************************************************* मेरा देश आज दो नामों में बँट गया है, भारत और इण्डिया भारत पूर्वीय दैवीय गुणाच्छादित सभ्यता का प्रतीक, और इण्डिया पाश्चात्य सभ्यता काl भारत इण्डिया के भार से दबा जा रहा है, अधोपतन के गर्त में डुबाया जा रहा हैl भारत की सात्विक संस्कृति की छाती पर, इण्डिया की … Read more

फागुन

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** फागुन आया मस्ती लाया,रंग गुलाल उड़ाये। बाग-बगीचा सुंदर दिखते,भौंरा गाना गाये॥ पीले-पीले सरसों फूले,खेतों में लहराये। सोने जैसे गेहूँ बाली,सबके मन को भाये॥ खुश होकर के नाचे गोरी,आँचल को लहराये। बाग-बगीचा सुंदर दिखते,भौंरा गाना गाये॥ ढोल-नगाड़ा बाज रहे हैं,फाग गीत सब गाये। बच्चे-बूढ़े सभी जनों ने,मिलकर शोर मचाये॥ … Read more

क्या यही माँ ??

सुषमा मलिक  रोहतक (हरियाणा) ************************************************************************************* पूछ रही हूँ मेरी माँ मैं तुझसे,बस तू ये मुझको बता दे, क्यो फेंका मुझे कूड़ेदान में,अब मुझको तू ये जता दे। नौ महीने तक रखा पेट में,फिर ऐसी क्या मजबूरी थी, नहीं चाहिए थी बेटी तुझको,तो पैदा करनी जरूरी थी। क्या तेरी कोख में पली नहीं,या मैं तेरे खून … Read more