स्वामिनी थी जो संसार की
कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** रचनाशिल्प-रगण २१२-८ थी पली जो कभी, राजसी ठाट से।राम के साथ वो, शौक से जा रही। जो कभी भी नहीं, वेदना को सही।पादुका के बिना, ही चली जा रही। छोड़ प्रासाद को, संग श्री राम के।आज माँ जानकी, त्याग में जा रही। कोमलांगी सिया, थी पली नाज से।भूमिजा शूल पे, हर्ष … Read more