स्वामिनी थी जो संसार की

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** रचनाशिल्प-रगण २१२-८ थी पली जो कभी, राजसी ठाट से।राम के साथ वो, शौक से जा रही। जो कभी भी नहीं, वेदना को सही।पादुका के बिना, ही चली जा रही। छोड़ प्रासाद को, संग श्री राम के।आज माँ जानकी, त्याग में जा रही। कोमलांगी सिया, थी पली नाज से।भूमिजा शूल पे, हर्ष … Read more

उत्सव फागुन का

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** रश्मियों ने उतार दी रजाइयाँ, बसंत मदन जब उतरा आँगनश्रृंगार बसंत के अंक से अवतरा, अबीर गुलाल-सा अब फागनस्वर्णिम पर्णों की बारातें-बारातें, वन, उपवन और हर काननचहक चुलबुली चिड़ियाओं से, गूँज उठा है हर मधुबन-मधुबन। गहन कानन में पलाश बाबा ने, ज्वाला पहन दिए अंजामजैसे गहन रजनी से प्रस्फुटित, होता है … Read more

सनातनी महा ‘मानवकुम्भ’

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** प्रयागराज का संगम महाकुम्भ,हुआ सदियों में सनातन का महा मानवकुम्भदुनिया के हर ओर से पहुँचे सनातनी निकुम्भ,हिल गई दुनिया, देश हिला देख ऐसा जनसैलाब कुम्भ। भारत में उमड़े जन सैलाब से दुनिया के भक्त महाकुम्भ आए अनंत,संगम में महा कुम्भ स्नान का है, सनातनी किंवदंतपापों से मुक्ति, जीवन पाए मोक्ष, … Read more

फिर प्यार का मौसम आया

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तेरे आने की खबर,दिल को कैसे न हो खबरचेहरे का हर एक रोम,खुशी से खिल उठा। आँखों से नूर बरसा,पलकों से प्यार झलकाहोंठों ने मधुर गीत,जैसे खुद-ब-खुद गुनगुनाया। कानों में पुरवाई झोंके,प्रेम रस घोल गईमीठे सपनों में,रुनझुन नूपुर की ताल मेंमन मयूर झंकृत हो उठा। तेरे आने की खबर सुनकर,हृदय के … Read more

क्या हो रहा है ?

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** या रब तेरी दुनिया में क्या आज हो रहा है,हमको जगाने वाला लोरी सुना रहा है। रुसवा हुआ उन्हीं से दिल के करीब थे जो,यह सोच*सोच घर में आँसू बहा रहा है। दुनिया की भीड़ में ही हम खो गए कभी के,कोई नाम ले के मेरा मुझको बुला रहा है। … Read more

सपनों-सा बचपन बीता

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* सपनों-सा बचपन बीता, चली गई नानी की कहानी।अब बहुत बड़ी हो गई, जिसे कहते थे गुड़िया रानी॥ मधुरिम यादें आती है अब, मुझको ए बचपन तेरी,अब तो सारी चली गई है, उस जीवन की मस्ती मेरी।इतरायें झूमें गायें, नाचूँ होकर में दीवानी,सपनों-सा बचपन बीता, चली गई नानी की कहानी…॥ सब … Read more

दूसरी दुनिया… कैसी होगी ?

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* नहीं जानता कोई भी,वो दुनिया कैसी होगी ??बेखौफ जा रहे मर-मर के,वो दुनिया कैसी होगी ?? क्या दुःख-दर्द वहाँ के कम होंगे,क्या बिछड़े अपने मिलते होंगे ?जब करती तुलना इस दुनिया से,क्या सुख के बादल उड़ते होंगे ? कई जा चुके, कई जा रहे,इस दुनिया से सब भाग रहेबेखौफ जा रहे … Read more

‘आत्मदाह’ समाधान नहीं

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** इस दुनिया में हर व्यक्तिपरेशान है,आत्मदाह किसी भीसमस्या का समाधान नहीं है। आत्मदाह करने से हम,तो दुनिया छोड़कर चले जाएंगेपीछे घर वालों के लिएहजारों समस्याएं छोड़ जाएंगे। दुनिया की प्रत्येक समस्याका समाधान है,आत्मदाह करना एककायराना काम है। ८४ लाख योनियों के बादमानव जीवन मिलता है,आत्मदाह करने से हमेंकुछ भी … Read more

बसंत रंग गया कुम्भ रंग में

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* झूमी पवन आया बसंत, बारह वर्ष तपे थे प्रान,मैं बनूँ पंच प्रसुन बान, तुम अनंग बन गाओ गान। यह कुम्भ और यह मधुमास, उत्सव का यह चरमोत्कर्ष,आध्यात्म का एक बीज मंत्र, उत्साह का एक आसमान। पंछी हृदय ऊँची उडा़न, कर कल्पना तट कल्प वास,तन-मन करें आओ प्रयाग, हिय संगम में हुआ विहान। … Read more

आया चुनाव, मांगते फिरे ये वोट

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* आया है चुनाव फिर,झुके हैं सभी के सिरमाँगते फिरे ये वोट,इन्हें आजमाइए॥ नोट से लुभाता कोई,वादे कर जाता कोई,जीत-हार हो किसी की,लोभ में न आइए॥ जाति धर्म संप्रदाय,नेताओं के ये सहायकरेंगे प्रयास सभी,जीत होनी चाहिए॥ मन की व्यथा जो जाने,नेता भी उसी को माने,लोक-लुभावन नारे,इन पे न जाइए॥ परिचय-पेशे से … Read more