प्रेम-प्रकाश से संसार भर दे

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव वीणा वादिनि,विद्या दायिनीमाँ शारदे हमें वर दे,जीवन पथ में उजियारा भर दे। हंस वाहिनी,ज्ञान प्रदायिनीहे माँ सरस्वती,अज्ञानता से हमें तार दे। श्वेत रूपिणी,कला की तू देवीपुस्तक तूलिका हस्ते,मुक्ता हार धवल वस्त्र पर सोहे। प्रज्ञा की देवी माँ भगवती,पद्मासन में सुशोभित।हर ओर गूंजे संगीत … Read more

ऋतु बसंत मनभावन

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** वसंत पंचमी:ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… आई ऋतु बसंत मनभावन,किया प्रकृति ने नव श्रृंगारपीली सरसों मन ललचाया,अनुपम प्रकृति का यह उपहार। चलती मधुर बयार सुगंधित,हर्षित होते पुलकित पातखिले पलाश लाल हुआ तरूवर,मनवा मंद-मंद मुसकात, अरुण प्रभात सुशोभित उपवन,घूम-घूम करे मधुकर गुंजनडाली-डाली कोयल काली,कुहू-कुहू कर देती तान। प्रकृति सिखाती सीख मनोहर,प्रेम रंग … Read more

किसने रची विजय गाथा…?

ऋचा गिरिदिल्ली******************************** कहीं तन की व्यथा,कहीं धन की व्यथाकहीं मन की व्यथा,यही है जन-जन की व्यथा। फिर…किसने रची विजय गाथा…?

हम दोनों के दरमियान दीवार

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** दरमियान हम दोनों के दीवार,वक्त ने भी कैसी करी है दरकारसुनता कोई भी नहीं जब होती,है कोई बात अपना भी नहीं सार। जब दोस्त की दोस्ती ही नहीं,तो जहां फीका लगता सब बेकारन भूख न प्यास न कोई बदलाव,जीवन नीरस तुम बिन नहीं बहार। वो खाना-पीना मौज-मस्ती वो,गॉसिप करना मनोरंजन … Read more

वेदमाता भवानी

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… करूँगी सदा वंदना मैं तुम्हारी,भवानी सुनो प्रार्थना है हमारी।बना दो विवेकी हरो अंधियारा,पुत्री हूँ तुम्हारी बनो माँ सहारा। मिटा दो भवानी अज्ञता हमारी,करूँगी सदा वंदना मैं तुम्हारी…॥ पता है तुम्हें मैं बड़ी हूँ अज्ञानी,तुम्हीं वेदमाता तुम्हीं हो भवानी।सुनो माँ भवानी पुत्री हूँ तुम्हारी,करो … Read more

मधुमास में भ्रमर गुंजार

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… करे भ्रमर गुंजार, ऋतुराज की बहार,कोयल भी गाए गान, मौसम सुहाना है॥मात शारदे है आई, धूप लगे अलसाई,मधुमास में मधुर, भ्रमर का गाना है॥ करे खग कलरव, लगे रमणीय भव,भ्रमर का गुनगुन, गीत का खजाना है॥बनी दुलहन धरा, सुनहरी पीतांबरा,मधुमास का समय, … Read more

मधुमास खुशहाली लाया

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मधुर मत्त मन माधवी, आया है मधुमास।खुशहाली लायी प्रकृति, यौवन कलसी हास॥ पीत वसन परिधान में, वसुन्धरा तनु आज।बहकी कलसी दिल प्रिया, प्रिय वसन्त आगाज़॥ नव बसन्त मधुरिम छटा, हर्षित हिय मधुमास।प्रीत युगल अनुराग मन, पीली कलसी पास॥ लाली गाल गुलाब सम, कुसुमित अधर पलास।सुरभित तनु गुलडाउदी, लाजवाब मुखहास॥ … Read more

पुरवाई मद्धम-मद्धम

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… पवन की यह पुरवाई,चल रही है मद्धम-मद्धममौसम बदल रहा है,आ गई है बसंत बहार। ये ऋतुओं का खुशनुमा पल,पर्व त्योहारों के संगबदलते मौसम के रंग,आ गई है बसंत बहार। विद्या वाणी की वंदना करेंहम ज्ञान के भण्डार भरेंयह ऋतुओं की अंगड़ाई,आ गई … Read more

ऋतुराज पधारो

मीरा सिंह ‘मीरा’बक्सर (बिहार)******************************* वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… आओ जी ऋतुराज पधारो।मौसम के सरताज पधारो॥ तुझसे मिलने को है आतुर,कुदरत के यह सभी नजारें।महकी-महकी आज वादियाँ,सरसों फूली खेत हमारे॥मृदुल हवाएँ गीत सुनाती,दिल देता आवाज पधारो।आओ जी ऋतुराज पधारो,मौसम के सरताज पधारो…॥ मन बासंती हुआ हमारा,मस्ती में झूमे जग सारा।उत्सव का माहौल … Read more

अन्तर मन इतरा गया

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… तन के पत्ते हो गए, हरियर आज अनन्त।अन्तर मन इतरा गया, बाहर देख बसन्त॥ यौवन घट की कामना, महकी हुई बयार।तन के तट को भा गया, फूलों का त्यौहार॥ कोयल बोले बाग़ में, महकी, महुआ गन्ध।मन की कुंडी खुल गई, पात-पात अनुबंध॥ … Read more