शीशा और भविष्य

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** शीशा कोई भविष्यनहीं दिखाता है,शीशा केवल हमारीसूरत दिखाता है। हम जैसे होते हैंशीशा वैसा दर्शाता है,भविष्य से तो उसकादूर-दूर न कोई नाता है। हमारा भविष्य हमारेकार्य पर निर्भर होता है,जैसे कार्य करते हैंवैसा परिणाम होता है। भविष्य जानने के चक्कर मेंअपनी जिंदगी बर्बाद न करें,जिंदगी का एक लक्ष्यबना उस … Read more

चाय का नहीं मुकाबला

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कुल्हड़ वाली चाय का,भइया स्वाद निरालानहीं कर सके कोई,देखो इसका मुक़ाबला। सर्दी को यह दूर भगाती,फुर्ती बदन में झट ले आतीरिश्तों को मज़बूत बनाती,इसका स्वाद बहुत ही भाता। देश-विदेश की सैर करो जी,यह तो सभी के पास रहे जीकितनी तरह से ये हैं बने जी,सब इसकी तारीफ़ करें जी। लोग कई तरह … Read more

शिकवा नहीं किसी से

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** शिकवा नहीं किसी से किसी से गिला नहीं,न था नसीब में वो हमको मिला नहीं। कर्मों का जिंदगी में कोई मोल ही नहीं।बस कर्म करते जाइए, चाहें सिला नहीं। कितना गुरूर उसको फकत आशियाँ पे था,खंडहर-सा इक मकान था कोई किला नहीं। मझधार में बिछड़ के कुछ ऐसा हुआ है … Read more

जागो जन, जागो अब तो…

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* मुफ्तखोरी और राष्ट्र का विकास… हो रहा है शोषण कितना हर इंसान जूझ रहा,ठगी और मुफ्तखोरी से सबका लालच बढ़ रहा। रही नहीं हमदर्दी किसी से, सबका शोषण हो रहा,आज का मानव देखो कितना खुदगर्ज हो रहा। आम आदमी हो, चाहे कोई नेता हो,अब रिश्वतखोरी से नहीं डर रहा। अपने हित … Read more

तुमको पाना

सुनीता रावत अजमेर(राजस्थान) ******************************************* पाना मुझको,जितना, जो भीतुमको पाना…। सखा सहज तुम,केशव मेरेहर पल यह मन,तुमको टेरे…। लगे अधूरा,जीवन कातुम बिन हर गाना…। मन की सच्ची,अभिलाषा कोदया-क्षमा की,परिभाषा को…। जितना, जो कुछ,जाना-मानातुमको माना…। तुमसे जानी,जगत-कहानीज्ञान-ध्यान की,महिमा-वाणी…। बना मुझे जिज्ञासु,डगर मेंछोड़ न जाना…॥

उड़ूंगी मैं सारा जहान

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** पापा तुमने किताब दी, स्कूल दिया,और दिए सुन्दर सुन्दर परिधानआगे बढ़ थोड़ी और आजादी दे दो,फर-फर करती उड़ूंगी मैं सारा जहान। जग से लड़कर मुझे विद्यालय भेजा,मेरे लिए की प्रार्थना व रखा रोजापढ़कर, किताबों से लड़कर बड़ी हुई,विद्यालय में सफलता पा खड़ी हुई। अभी मुझे जाना है बहुत दूर,पैरों में … Read more

यदि तुम…

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** यदि तुम विवेक सम्पन्न हो,धर्म की वैज्ञानिकता को समझते होअभ्युदय व निःश्रेयस की सिद्धि करते हो,तो निश्चय ही तुम पुरुष हो…। यदि तुम ऊर्ध्वगामी हो,प्राकृतिक सम्पदा का संवर्धन करते होक्षणिक लाभ से दिग्भ्रमित नहीं होते हो,तो निश्चय ही तुम पुरुष हो…। यदि तुम सहज व शिष्ट हो,पराक्रमी के साथ-साथ कर्मनिष्ठ होआत्म … Read more

कृष्ण खोजती रहती हूँ

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* विश्वास नहीं है अब तो मुझको, इन वासंती फूलों पर,काँटों के आगोश में रहकर, ये पलते हैं शूलों पर। इसकी हर डाली में काँटे, लता मुकुट पर भी काँटे,फिर क्यूँ इतने काँटों में रहकर, सदा ये मुस्काते। जीवन अपना धाराओं के मध्य, मचलता पानी है,मिटा बुलबुला पानी का, फिर कुछ … Read more

बेरिया के आँसू…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)*************************************** बेरिया लाली-लाल होकर कर रही है इंतजार बच्चों का,पर पता नहीं, बच्चे कहाँ खो गए हैं ? गाँवों-शहरों की गलियों में, जंगलों की जालियों में,अनगिनत बेरिया बेरों से लदकर खड़ी हैं। जाने क्या हो गया बच्चों को! बेरिया आश्चर्य में पड़ी है,हवाओं के झोंके से या किसी गिलहरी के आने से,अजीब … Read more

सुबह-सवेरे

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** चलती सुबह सवेरे शीतल, प्यारी-प्यारी हवाएँ,किरण-भोर की उजली-उजली, झाँकने घरों में आएँ। सूनी-सूनी सी सड़क गली शटर दुकानों के है बंद,छिप गया जा कर चाँद कहीं, दिखती नहीं तारिकाएँ। पूसी अपने को चाट रही, मोती भी दुम हिलाए,गौरैया फुदक रहीं अँगना, देहरी आ चहचहाएँ। पेपर वाला भैया आया, भागा झट पेपर डाल,मंदिर … Read more