झम-झम सावन

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** झम-झम सावन,बरसे आँगनहर्षित चेतन,सुरभित उपवन। प्रभु का शासन,कितना पावनपानी छन-छन,सुख सम्मोहन। झूलें सब जन,करते गायनबादल गर्जन,उर में कम्पन। हैं मोर मगन,करते नर्तनपुलकित जीवन,हो परिवर्तन। शोभित यौवन,लज्जित आननअलकें मादन,आए साजन। लिपटा तन-मन,है मौन बयन।अंतर का धन,मेरा अवलम्बन॥

सृजन का ये जुनून

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* जीवन की ये लंबी डगर,कभी धीमी-कभी तेज़ रफ़्तारसिमटी लम्हों में तो, कभी खींच तान,सुबह से शाम न होती एक समान। कठिन है यहाँ हर कदम,चौकन्ना रहना पड़ता है हर वक्तन जाने कब कौन किधर,लगा दे घात पीछे से असरदार। विश्वास पर टिका है हर संबंध,डर लगता है अब विश्वास तुझ परअच्छे-अच्छों … Read more

नफ़रत क्यों अपनों से ?

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* अनजान-सा हो गया है जीवन का ये सफ़र,बदल सी गई है ये सुहानी सी डगर। वो भी दिन थे जब गैर भी अपने होते थे,आज अपने भी पराए से होकर रह गए हैं। जीवन की इस भाग-दौड़ में कोई नहीं रहा अपना,बदल-सा गया है जीवन का हर एक सपना। न जाने … Read more

फितरत से डर नहीं

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ आज वक्त ऐसा आ गया,इंसान का वजूद ही धोखा हो गयावह फरेब पर फरेब कर रहा,फिर भी अपनी इस फितरत से वह नहीं डर रहा। जवाब कहीं-न-कहीं देना ही होगा,अपने कुचक्र में इंसान क्यों उलझ रहा हैकाँटे बोने वाला क्या चाहता है,फिर भी अपनी इस फितरत से वह नहीं डर … Read more

समझदारी

डॉ. बालकृष्ण महाजननागपुर ( महाराष्ट्र)*********************************** वे,कलएक-दूसरों केजानी दुश्मन समझे जाते थे। एकाएकआज, सत्ता में आते हीसारे गिले-शिकवे भुलाकर,जानी दोस्त हो गए, औरसमझदारी से मलाईमिल-बाँटकर खाने लगे॥ परिचय- नागपुर (महाराष्ट्र) निवासी डॉ. बालकृष्ण रामभाऊ महाजन की जन्म तारीख १० अक्टूबर १९६१ और जन्म स्थान नागपुर है। आप वर्तमान में नागपुर स्थित सुरेंद्र नगर में स्थाई तौर पर … Read more

सर्दी लुभाने लगी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* गर्म चाय की प्याली लुभाने लगी है,सर्दी-मौसम-हवा डराने लगी है,ग्रीष्मातप से उद्धार कराने लगी है,प्रीत मुदित हिय सुखसार बनाने लगी है,सर्दी का कहर ठिठुराने लगी है, शबनम के मोती ओस लुभाने लगी है,रविदर्शन ढँक चहुँ दिक् कोहरा छाने लगी हैकहाँ सर नदी सरसिज फुलाने लगी है,अलाव का ताप राहत … Read more

‘मुफ्तखोरी’ रोकती राष्ट्र उत्थान

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* मुफ्तखोरी और राष्ट्र का विकास… मुफ्तखोरी और राष्ट्र का विकास,सुनकर लगता हाय! कैसा विचारअकर्मण्य की संख्या बढ़ती जाए,लगता यह सोच बड़ा-सा उपहास। यह भूमि रही कर्मशीलों का मान,बच्चों की शिक्षा बुजुर्ग सम्मानजीवन के कार्य कर्म बनाए कर्मठ,समझता तब मानव जीवन मान। मुफ्त सुविधा नहीं होता सम्मान,दिखा रहे जन झूठा अभिमानआज … Read more

आ गई सर्दी

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* सर्दी की ऋतु आ गई, जलने लगे अलाव।कुहरा अब छाने लगा, बढ़ता शीत प्रभाव॥बढ़ता शीत प्रभाव, लगे मौसम सुखदाई।ठंडी चले बयार, सभी को भाय रजाई॥हाड़ कॅंपाती ठंड, बड़ी ये ऋतु बेदर्दी।लगे सुहानी धूप, डराती सबको सर्दी॥ कुहरे के कारण हुआ, आवागमन निरुद्ध।बचते शीत प्रकोप से, लड़ते इससे युद्ध॥लड़ते इससे युद्ध, … Read more

सुख-दुःख का स्वप्न ज़िंदगी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** साँसों का हिसाब है ज़िंदगी,सुख-दुःख का स्वप्न है ज़िंदगीकभी रुलाती, कभी हँसाती ज़िंदगी,राजा से रंक बनाती है ज़िंदगी। मौसम को महसूस कराती है ज़िंदगी,इंसान की मददगार है ज़िंदगीसच का साथ देती है ज़िंदगी,प्यार-मोहब्बत का नाम है ज़िंदगी। भूखे की आस होती है ज़िंदगी,पेड़ों की घनी छाँव होती है ज़िंदगी।माता-पिता का आशीर्वाद होती … Read more

पंडित वही, जो करता उत्थान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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पंडित कहलाता वही, जो रखता है ज्ञान।
धर्म, कर्म को मानकर, नित करता उत्थान॥
नित करता उत्थान, मान जिसका बढ़ जाता।
अंधकार को मार, उजाला जो ले आता॥
रखे चेतना संग, करे पापी को दंडित।
बाँटे सबको नीति, वही कहलाता पंडित॥

पंडित का हो मान नित, कहता है यह धर्म।
ज्ञान-वान पुजता सदा, यह है चोखा मर्म॥
यह है चोखा मर्म, ईश को जो समझाता।
आलोकित संसार, नवल वह तो रच जाता॥
जो होता है दिव्य, ताप से होता मंडित।
कहे सनातन मान, वही होता है पंडित॥

पंडित से ही धर्म को, मिलता है आकार।
और ज्ञान, तप, रीति की, आती सदा बहार॥
आती सदा बहार, सुमंगल गुंजित होता।
ज्ञान बिना संसार, सिसककर नित है रोता॥
मानो सारे धर्म, नहीं हो पाये खंडित।
होता ईश्वर-दूत, जिसे सब कहते पंडित॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में है। आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर)में हुआ है। एम.ए.(इतिहास, प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैं। करीब ४ दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई है। गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैं। साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो (३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं( विशेषांकों) का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंk  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।

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