नया सेतु
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** बावरा ये मन जैसे उड़ती पतंग,घूमती मैं फिरती हूँ हो के मलंगरोको पतंग, कहीं उलझ न जाए,खींच ज़रा डोर उसे राह पे लाएँ। हौले से धीरे-धीरे खींचना ये डोर,नाज़ुक है मन खोजें ममता का छोरअचरा के छाँव तले ममता और प्यार,मिलता है सारा सुख, सारा दुलार। कहाँ मैं सुनाऊँ दुख-दर्द ग़म की … Read more