विविधा सृजन सम्मान-२०२४ घोषित

hindi-bhashaa

श्रीगंगानगर (राजस्थान)। विविधा सृजन सम्मान-२०२४ की घोषणा कर दी गई है। सभी साहित्यकारों को संस्था के स्थापना दिवस (२० जनवरी २०२५) पर आयोजित सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा।संस्थान की ओर से डॉ. एन.के. सोमानी ने बताया कि पुस्तकों की समीक्षा के लिए साल २०२४ हेतु स्व. श्रीमती कृष्णा देवी कामरा स्मृति कविता पुरस्कार हरियाणा … Read more

मैं भव से तर पाऊँ

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* मेरी अभिलाषा जीवन में, प्रभु दर्शन सुख पाऊँ।दुर्गुण लक्षण मिट जाएं, मैं शुभ गुण से सज जाऊँ॥ मैं अपने सम्बोधन से, सम्बंधों को रच पाऊँ,हर जीवन से मिलके, जग में मैं खुशियाँ भर पाऊँ।धड़कन-साँसों में रहके, संतुष्ट-सुधा बरसाऊं,मेरी अभिलाषा जीवन में…॥ मुझसे कुछ दुष्कर्म हुए तो उनकी माफी मांगूं,मात-पिता की … Read more

मेड़-मुंडेर कहाँ ?

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** बचपन का प्यारा गाँव कहाँ,पनघट का पीपल-छाँव कहाँछन-छन घुँघरू का पाँव कहाँ,गोधूलि घंटी गौ माई कहाँ ?अब बाल्य काल परछाईं कहाँ,गौ मल-मूत्र लेप-लिपाई कहाँभारत की छोटी गौ माई कहाँ,पहले का दही-दूध-मलाई कहाँ ?झूलती टूटी खाट-चटाई कहाँ,अब देशी गुड़-मिठाई कहाँवो भाई-बहन रूसवाई कहाँ,बैलों से खेत जुताई कहाँ ?भाई-भाई का स्नेह व … Read more

पता नहीं…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘पत्ते’ जब तक डाली पर रहते हैं,वह बहुत खुश रहते हैंपर सुख-दु:ख की इस बागडोर में,वह कब डाली से टूट कर गिर जाएं-पता नहीं…। जीवन भी इन्हीं पत्तों के समान है,फिर क्यों हम करते हैं इतना अभिमानअरे कब साँसें थम जाएंगी!और यह प्राण-पखेरू उड़ जाएं- पता नहीं…। उदित हुआ यह … Read more

आसान नहीं ज़िंदगी

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* ज़िंदगी के इस सफ़र में,कहाँ कोई साथ निभाता हैचलना पड़ता है अकेले,काँटों में भी पैर जमाना पड़ता है। यूँ ही आसान नहीं होती ज़िंदगी,हर कदम पर काँटे बिछे होते हैंचलना है बस संभलकर चलना,क्योंकि काँटों के बीच फूल भी तो होते हैं। काँटों भरी इस चुभन को,अकेले ही सहना पड़ता हैमंजिल … Read more

अनगिन रूप

मीरा सिंह ‘मीरा’बक्सर (बिहार)******************************* अनगिन रूप धरते भगवान,सब पर प्यार लुटाते हैंमाता बनकर पोसें-पाले,हँसना हमें सिखाते हैं। लोरी गाकर कभी सुलाते,गोदी कभी उठाते हैंपिता रूप जब धरे दयामय,कंधा हमें बिठाते हैं। हाथ पकड़ कर चले हमेशा,सच्ची राह दिखाते हैंबनकर साथी सबल सहारा,मंजिल तक पहुँचाते हैं। आए है जब पग में बाधा,हिम्मत बल बन जाते हैंभूल … Read more

भज-भज शिव को शिव हो जाना है

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)********************************** आवागमन का चक्र घूमता तुममें शिव!,तुमसे जनित हो तुममें ‌विलय हो जाना है।स्वयं अजन्मे अंश रूप में मुझमें शिव!,भज-भज शिव को मैंने शिव हो जाना है। नाद ब्रह्ममय सर्व कला मर्मज्ञ शिवे!,करो कृपा मुझपे मैं हूँ अल्पज्ञ शिवे!दो अपना स्पर्श मेरे मन-बुद्धि को,रोम-रोम में तुम झृंकत सर्वज्ञ शिवे!कृपाकोर तुमसे … Read more

बड़ों का आदर

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** धूप हो या छाँव हो,पिता का अपने गाँव होचाहे मनुहार करे ताऊ,चाहे तंग करे दाऊ। बच्चे तो बच्चे होते हैं,वो मन के सच्चे होते हैंबुजुर्गों का दुलार हो,माँ-बाप का प्यार हो। सिर पर सबका हाथ हो,भाई-बहनों का साथ होआँखों में जैसे सपना है,सब कुछ लगता अपना है। वीरान है जीवन … Read more

दिन सलोने बचपन के

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आज बालदिवस शिशु ढाल कवच, खु़द बचपन याद दिलाता हैचाचा नेहरू है जन्मदिवस, उल्लास बाल नव छाता है। अरुणिम विकास हो बाल वतन, रविकान्त तुल्य जग भाता हैविद्वेष रहित उन्नति शिक्षण, दीन धनी बाल सम पाता है। दिल सलोने बचपन के अरुणिम, पद्मनाभ सृष्टि निर्माता हैशनि सूर्य तनय हनुमन्त … Read more

बापू के आदर्श समझें

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** बापू के आदर्श समझउन पर मानव यदि कार्य करें,मूर्त प्रेम मानव मानव काघृणा रहित परिवेश बने। ललित-कला दर्शन विज्ञानसब मानवता कल्याण करें,रीति-नीति सब विश्व प्रगति हितबढ़ें और संताप हरें। संस्कृत वाणी,भाव कर्म होंरूढ़ि-रीतियाँ दूर करें,धन-बल से हो जहाँ न शोषणएक सभ्य समाज निर्माण करें। मुक्त जहाँ मन की गति होऔर मानव निडर … Read more