प्रदूषित हवा

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** दम तोड़ती प्रदूषित हवा,शहरों से निकल कर पहुँच रहीगाँव की ओरअनदेखा कर रहे समस्या को लोग,स्वच्छ प्राणवायु को दूषित करने मेंलोग जरा भी हिचकिचा नहीं रहे। भाग-दौड़ की व्यस्त दुनिया में,प्रदूषित हवा को रोकने कीसोच ही नहीं विकसितअस्पतालों के चक्कर लगाते इंसान को,समझ आने लगी जबवायु प्रदूषण से निकलने लगीअर्थियाँ। आक्सीजन देने … Read more

कल हो ना हो

रश्मि लहरलखनऊ (उत्तर प्रदेश)************************************************** भविष्य,किसने देखाजी-भर जीओ,समय सुनहराअनमोल। प्रेम,पूरा निभाओदिल में रहो,साथ चलोप्रेमराह। जीवन,युद्ध समझिएपरहित भी करना,दुर्गम राह,मनुजता। संकल्प,शिखर तकविघ्न भरे सोपान,प्रखर बनिएसफल। वर्तमान,समझो मोलमानव जीवन अनमोल,सदा बढ़ोप्रगति। मृगतृष्णा,मत उलझोछल भौतिक जीवन,हर्षित रहोपरोपकार। देश,सबसे पहलेअपना सुख दूजा,जागरूक समाजशान्ति। कदम,सरल उठाओउत्कृष्ट प्रदर्शन हो,ज्ञान-विज्ञानकल्याण। आत्मज्ञान,मन आलोकितजन-मन हित,रीति सद्नीतिकर्म। स्वाभिमान,सदा चाहिएराष्ट्र बड़ा गणतंत्र।कल क्या ?भविष्य॥

हिमालय की चिंघाड़

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)*************************************** ज्योतिर्मठ की दरारें महज दरारें नहीं हैं,हिमालय और धरती का भीषण रुदन हैभगवन शंकराचार्य की उध्वस्त होती,तपोभूमि का क्रंदन और आक्रंदन है। आज मुझे घिर-घिरकर याद हो रही है,विलुप्त हो चुकी उस मैया सरस्वती कीजो कभी गंगा-सी कल-कल बहती थी,तट पर तरुदल के वैभव में रहती थी। उसी के तट पर … Read more

‘प्रतीक्षा’

रश्मि लहरलखनऊ (उत्तर प्रदेश)************************************************** प्रिय!,तुम्हारी प्रतीक्षा मेंजला देती हूँ कुछ दीपअनायास,तुलसी के आसपास! भर जाता है रोम-रोम में,तुलसी की सुरभि से लिपटातुम्हारा भाव!पत्तियों की ओट से झाॅंकतीजलती लौ,हर लेती है मेरा हर अभाव! मेरे पास रह जाता है,मेरे शब्दों का पल्लवस्वप्नकोष का कलरवऔर,बस यूॅं ही तुम्हारे बिना…मेरा यूँ बीतना,सिखा देता है अपने प्रेम के दरख्त … Read more

बचपन के वह पल

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** बचपन के वह बीते पल छिन,उसका जाना लौट न पाना,बचपन में बढ़ने की इच्छा,बढ़ कर मन का बचपन जाना। नाटक पट लीला नौटंकी,जो पढ़ना न हो सौ बहाना,मेला ठेला पर्व त्यौहार,मासूम बचपन का तराना। मिट्टी का वह बर्तन भांडा,गुड्डे-गुड्डी ब्याह रचानाकॉमिक्स की प्यारी दुनिया,थोड़ी शरारत धूम मचाना। मुर्गा बनना अंडा मिलना,होम वर्क … Read more

स्मृतियों के चित्र

वंदना जैन ‘शिव्या’मुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ अंतर्मन के रिक्त कैनवास पर,स्मृतियों ने कुछ चित्र उकेरे हैं। कुछ धूप से सुनहरे चटकीले,कुछ श्यामल से मेघ घनेरे हैं। एक मुस्कुराता उजला चाँद तुम-सा,दो चकोर से तकते नयन मेरे हैं। बिरौनियों से छन कर दूर दृष्टि में,इंद्रधनुषीय स्वप्नों के प्रीत घेरे हैं। कुछ झंझावात विरह रात्रि संग,तिनके मिलन आस के … Read more

कलयुग में शिव नाम ही

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************************** श्री शिवाय नमस्तुभ्यम… करें प्रार्थना आज हम, हरो दीनता आप।हे शंकर शिव शम्भु श्री, दुखिया करें विलाप॥ दुखिया करें विलाप हैं, हे शिव भोलेनाथ।करो छत्रछाया प्रभो, पकड़ो सबका हाथ॥ पकड़ो सबका हाथ प्रभु, हे भोले सरकार।जगत उदधि से कर चलो, नैया मेरी पार॥ नैया सबकी पार अब, करो शम्भु कैलाश।कलयुग … Read more

मैं झारखंड बोल रहा हूँ…

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** मैं झारखंड बोल रहा हूँ,प्रगति पथ पर डोल रहा हूँआँखों में लिए गम के आँसू,अपने दु:ख के पत्ते खोल रहा हूँ। जन्म हुआ मेरा सन २००० में,फंसा रह गया मैं अपने हीजाति, धर्म और स्थानीयता,जैसे मुद्दों के विचार में। मैं झारखंड बोल रहा हूँ,,नेता अपना मुँह खोल रहा हैसंस्कार उस … Read more

अनुभव व नदी का रोड़ा

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** नदी में लुढ़कते रोड़े की मानिंद,हमने लाखों-लाख खाए थपेड़े हैंछिल-छिल टूट बिखर कर रेत ज्यों,हुए अब तो भीतर अनुभव घनेरे हैं। जो बचा जीवन है शेष अभी टूट जाने से,वह लगता छूटे तट पर ज्यों चिकने रोड़े हैंउसकी तराश से ही लगता है पता साफ-साफ,कि इसने कितने अनुभव के ओढ़न ओढ़े … Read more

आसमां की उड़ान

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* आसमां की उड़ानों तक, सपने बुनेंगें।सितारे अब अपनी, कहानी सुनेंगे॥ चाँद ठहरा नहीं, यूँ ही चलता रहा,रोशनी के संग-संग, दमकता रहा।तूफानी ये बादल, कभी फिर घिरेंगें,आसमां की उड़ानों तक…॥ निशां मंजिलों की कभी, मिल जायेगें,प्रियतम मेरे घर को, चले आयेगें।हम मिलकर नये से, सफर में चलेंगे,आसमां की उड़ानों तक…॥ हम … Read more