घेर लिया तृष्णा ने
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** चित्त नहीं परिपक्व विविध विधि,घेर लिया तृष्णा नेसभी इंद्रियाँ विभ्रमित करतीं,उलझा मन विषयों में। तेजहीन मैं क्या उत्तर दूँ!ज्ञान है मुझमें सीमितऊपर-नीचे दायें-बायें,माया करती मोहित। श्रांत आज मन मेरा कहता,हित अपना खोजो तुमश्रवण चक्षु और चंचल मन को,विषयों से मोड़ो तुम। अन्तर्मन की ज्योति जला कर,मन से अपने बोलोतिमिर आवरण सकल हटा … Read more