अर्पण तन-मन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ललिता ममता अंचला, जननी तू अवलम्ब।अर्पण तन मन नित नमन, स्वीकारो जगदम्ब॥ माँ बेटी बूआ बहन, नमन करो स्वीकार।वधू चारु सजनी प्रिये, ममता करुणाधार॥ तन मन धन अर्पण स्वयं, सन्तति पति परिवार।सीता गीता अम्बिका, राधा मीरा प्यार॥ नवकिसलय कोमल हृदय, कामधेनु उर क्षीर।ममतांचल छाया सतत, स्नेह नैन भर नीर॥ … Read more

हर मन जोड़ें

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** आइए,हाथ मिलाएँचहुँ दीप जलाएँ,मिटे अँधियाराभारत। आइए,ईर्ष्या छोड़ेंहर मन जोड़ें,दीप समरसताआँगन। आइए,स्वार्थ त्यागेंमन विश्वास जागें,कर्म करेंपुण्य। आइए,बनें संवेदनशीलनफ़रत भूल जाएँ,प्रेम बरसाएँवतन। आइए,इस दीपावलीकर्तव्य पथ चलें।शपथ लें,राष्ट्र॥

अपनों की तस्वीर

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** बुजुर्ग की तस्वीर दीवार पर टँगी,कुछ दिन चढ़े ताजे फूलफिर प्लास्टिक के नकली फूल चढ़े,धूल चढ़ी। दीपावली पर ही झटका गया,ध्यान किसी का नहीं गयातस्वीर बोल नहीं पाती,मनोभाव अवश्य पैदा करती। ज्यादा जुड़ाव से टपक पड़ती आँसू की बूँद,रिश्तों के पायदान नहीं समझ पातेहोंगे बड़ों के रिश्तेरिश्तों की समझ नई पीढ़ी को … Read more

एक सहारा…

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** पत्नी स्वर्ग सिधार गई, मैं जीवन से हारा,बच्चे कटे-कटे रहते हैं, कोई नहीं सहारायहाँ अकेला पड़ा हुआ मैं दूर गगन में ताकूँ,बैठ यहाँ एकान्त में, विस्मृत स्मृतियों में मैं झांकूँथा बेहद खुशहाल मेरा परिवार, न थी कोई चिंता,बच्चों के पालन-पोषण में, सारा जीवन बीताकिसी बात की कमी नहीं थी, सब सुख थे … Read more

तुम हो दीनदयाल

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************************** श्री शिवाय नमस्तुभ्यम… विनय करो स्वीकार प्रभु, तुम हो दीनदयाल।महादेव शिव शम्भु श्री, शशि धारक निज भाल॥ शशि धारक निज भाल हे, पशुपति भोलेनाथ।चरण वंदना आपकी, रहियो नित मम् साथ॥ रहियो नित मम् साथ अब, हे शिव शिवा महेश।सुबह-शाम शत्-शत् नमन, दूर करो सब क्लेश॥ दूर करो सब क्लेश प्रभु, … Read more

भोर की प्रथम किरण

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* एक नहीं, दो जहाँ को रोशन करने वाली नारी है,भोर की प्रथम किरण-सी लगती सँध्या की बेला नारी हैकठिन राह में हर संकट में धीर बँधाती जाती है,प्यार-दुलार, सेवा-समर्पण की मिसाल बस नारी है। दिव्य शक्ति से कठिन राह में बढ़ती जाती नारी है,अँधेरों में फिसली जिंदगी रोशन करती नारी … Read more

क्या पाया, क्या खोया!

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** उसको खोकर तो मेरे पास रहा कुछ भी नहीं।ये जिंदगी तुम्हीं से है, ऐसा तो कहा कुछ भी नहीं। भँवरे व तितलियाँ ही अलामत हैं प्यार के,इसके अलावा इजहार-ए-इश्क बचा कुछ भी नहीं। जज्बातों के भँवर में गवांया है दिल का चैन,खोकर सुकून-चैन सहा कुछ भी नहीं। बारिश का है … Read more

खो जाने दो

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** खो जाने दो हमें गुमराहियों के अंधेरे में,वाहवाहियों की हमें कोई दरकार नहींनहीं चाहिए हमें ऐसी ख्याति विख्याति,लोक मंगल का हो जिसमें विचार नहीं। कहाँ खोए रहे हर क्षण छिछले से शब्द न्यास में,बेकार वह बात जिसमें गरिमा का अधिभार नहींनफरत भली है उस दिखावटी प्रेम से भी कहीं,जिसमें हकीकत का … Read more

उड़ती हैं भारत की बेटियाँ

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ आगे बढ़तीं, नहीं वह किसी से डरतीं,सपनों को वह बुनतींपंख फैलाकर आसमान में,उड़ती भारत की बेटियाँ…। अपने भारत को खुशहाल बनाती,देश को सम्मान दिलातीकठिनाईयों में भी वह निडर होकर,आगे बढ़तीं भारत की बेटियाँ…। वह पुरुषों से कम नहीं,हर एक परिस्थिति में बार निकलना जानती हैदु:ख-दर्द-तकलीफ़ में वहदवा बन जाती हैं … Read more

घिरा अंधेरा जीवन पथ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भागमभागी चकाचौंध बस स्वार्थ सिद्धि अवसादित मन है,मायाजाल इस मकरव्यूह में भौतिक सुख आह्लादित तन है। छोड़ प्राप्त दुर्लभ जीवन उद्देश्य विरत नित मानस शोकाकुल,निर्विकार निश्चिन्त मनुज अन्त मिले न मिले दो गज ज़मीन है। हम रात-दिन चिन्तित अन्तर्मन रक्षण बस इंच इंच ज़मीन है,विस्मृत अपनापन रिश्ते अहमियत भाव … Read more