चुप-सी रहती हूॅं
कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* चुप सी रहती हूॅं,और कहीं खो-सी जाती हूॅंपता ही नहीं क्यों ?अपने में गुम-सी रहती हूॅं। कोई कुछ पूछे भी तो,कुछ बता भी नहीं पाती हूॅंपता ही नहीं क्यों ?अपने में गुम-सी रहती हूॅं। देखती हूॅं चारों ओर,कोई अपना नजर नहीं आता हैमन की व्यथा किससे बयां करूँ,सब स्वार्थ ही नजर … Read more