चुप-सी रहती हूॅं

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* चुप सी रहती हूॅं,और कहीं खो-सी जाती हूॅंपता ही नहीं क्यों ?अपने में गुम-सी रहती हूॅं। कोई कुछ पूछे भी तो,कुछ बता भी नहीं पाती हूॅंपता ही नहीं क्यों ?अपने में गुम-सी रहती हूॅं। देखती हूॅं चारों ओर,कोई अपना नजर नहीं आता हैमन की व्यथा किससे बयां करूँ,सब स्वार्थ ही नजर … Read more

मौन सत्य

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** साधन सुख-सुविधा,सुनामी की देख बाढ़सोने की लंका से,मानवता की देख हार। चक्रवात घेरे तरुणाई,की बात करेंदिशाहीन होती अरुणाई,क्या हाल कहें! लज्जा की लालिमा,लाल-लाल गालकंचन कुमुदिनी के,किसलय का हाल। गंध मकरंद गह,गली गुंजार करेंलोचन ललाट भाल,भामिनी की बात करें। शब्द झूठ, भाव झूठ,सब झूठा व्यवहार।एक मौन सत्य है बस,करो स्वीकार॥

छठ मैया की ही दया

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* पूज्य पर्व मैया छठी, पूजन बहुत महान।जग सारा वंदन करे, माता रखना आन॥ प्रकृति दिव्य तुम, मातरम्, रखती हो नित लाज।माता करतीं पूर्ण सब, हम भक्तों के काज॥ नदिया तट पर, सूर्य का, वंदन देता ताप।प्रभुता मिलती भक्त को, रहें शेष नहिं पाप॥ सूर्य-साधना तेजमय, जो देती वर्तमान।यश-वैभव परिवार को, मिलता … Read more

बचपन के दिन…

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* बचपन के दिन याद हैं, रहता मन उल्लास।चिंता और तनाव भी, कभी न आते पास॥कभी न आते पास, लाड़ सब खूब लड़ाते।रहते थे खुशहाल, कभी भी दुःख न आते॥बीत गया वह काल, उम्र तो है अब पचपन।सुखद सलोनी याद, काश! फिर आए बचपन॥ बीता बचपन का समय, सुखद सुनहरा काल।समय … Read more

पूजा का विस्तार

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* तुम्हीं प्रियतम तुम्हीं प्यारे से मुझको प्यार होता है,करूँ मैं प्रेम, जो पूजा का ही विस्तार होता है। करूँ आराधना, व्रत, नियम और पूजा सदा तेरी,मेरे तो चाँद तुम ही हो, जिसका दीदार होता है। पुजारिन बन गई तेरी जपूँ तेरी सदा माला,तेरा ही नाम जपने से तो बेड़ा पार … Read more

तेरी याद में…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ चल रहा हूँ यार तेरी याद में,तू मिले या ना मिले पता नहीं!प्यार का सहारा है बस साथ में,चल रहा हूँ यार तेरी याद में। देखा था जबसे तुझको,तेरे ही ख्वाब देख रहा हूँतू मिले या ना मिले पता नहीं!चल रहा हूँ यार तेरी याद में। जब कभी तन्हा रहता … Read more

समय संग कैसे दौडूॅं

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* गतिमान अनिल सम कालचक्र, समय के संग कैसे दौड़ूॅंकाठिन्य सृजित अभिलाष वक्र, हर विघ्न सुपथ कैसे मोड़ूॅं। पहचान समय उपयोग सख्त, ख़ुद वक्त साथ जोड़ूँ कैसे,जब लक्ष्य सुपथ संकल्प अटल, अनुगमन वक्त कैसे मोड़ूॅं। कर्त्तव्य बोध अनुकूल वक्त, सदाचार विनय खुद पथ जोड़ूॅं।जो चले साथ धर वक्त चरण, साफल्य … Read more

करो विनय स्वीकार

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************************** श्री शिवाय नमस्तुभ्यम…. करो विनय स्वीकार अब, महाकाल उज्जैन।दर्शन को व्याकुल हुआ, ये मेरे दो नैन॥ ये मेरे दो नैन अब, आज गए थक हार।कब आओगे शम्भु श्री, तुमको रहा निहार॥ तुमको रहा निहार अब, हे शिव दीनदयाल।इस जग में कोई नहीं, आकर हमें सम्हाल॥ आकर हमें सम्हाल प्रभु, हम … Read more

संसार ही स्वर्ग बन जाता

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** काश! सासें, बहुओं को बेटी ही मानती,बहुएं, सासों को मानने लग जाएं माताक्या जरूरत थी तब भिस्त की चाह की ?फिर तो यह संसार ही स्वर्ग बन जाता। बाप-बेटे,भाइयों को पत्नियाँ न लड़ाए,दोस्त-सा व्यवहार करने लगे हर भ्राताघर की बहुएं-बेटियाँ बहनों-सी रहें सब,फिर तो यह संसार ही स्वर्ग बन जाता। बहुओं … Read more

हमारा बचपन

बबीता प्रजापति झाँसी (उत्तरप्रदेश)****************************************** गगन भरा हो तारों से,और कच्चा घर का आँगन थापेड़ों से झाँकता था चंदा,कुछ ऐसा पहले बचपन था। हवा चलती थी ठंडी,तब न ए.सी.-कूलर थाएक पेड़ लगा था फूलों का,वो प्यारा सबका गुलमोहर था। एक बड़ी-सी चारपाईसब भाई-बहन जिस पर सोते थेमिलकर हँसते-गाते थे,एक,-दूजे के दु:ख में रोते थे। बड़ा पतीला दाल … Read more