कभी सोचा न था…

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* हर रिश्ते से बँधी थी पर कोई भी रिश्ता मेरा न था, रिश्तों में फासले तो थे पर वे इतने खौफनाक भी हो सकते हैं, कभी सोचा न था। हमसफर बनाया था जिसे, हमसफर तो था, पर साथी न बन सका। रहते थे इक मकां में पत्थर की तरह क्योंकि वो … Read more

कलम की दु:खभरी दास्तां

डॉ.रामावतार रैबारी मकवाना ‘आज़ाद पंछी’  भरतपुर(राजस्थान) ************************************************************************************************ सोच रही है पागल कलम,कैसी दुनिया आई है, लाज-शर्म के शब्द भूलकर,बे-शब्दों की झड़ी लगाई है पड़ी तमाशा देख रही हूँ,ऐसी धाक जमाई है, लुप्त हो रही मैं तो मेरे घर में,मुझ पर ऐसी शामत आई हैl सोच रही… मेरे कारण तू इंसान बना,फिर महान बना, इस भरी … Read more

नहीं चाहिए शराफ़त ऐसी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** दूसरों की लूटती हुई आबरू को देख बीच बाज़ार के चौसर पर, उसको बचाते-बचाते नासमझ मैं ख़ुद की आबरू लुटा गया, पर कमबख्त दस्तूर तो देखो इस बेदर्द दुनिया का,जिसके लिए अपनी सुकूनभरी जिंदगी की खुशहाली, दफ़न की,बिना सोचे ज़मीर के लिए वही गलबहियाँ करने को बेताब, जा … Read more

कुर्सी

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’ मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* कुर्सी की देखो माया, रचा है इसने खेल सारा चढ़ा है सब पर इसका रंग, क्या नेता-क्या अभिनेताl डोल रहे हैं इसके संग, जो पाए वह तर जाए जो देखे वह डर जाए, दुनिया नाचे इसकी उँगली परl काम गजब के कर जाए, देखो इसकी काली माया औरों को … Read more

शुभ संवत्सर नया साल

प्रो.स्वप्निल व्यास इंदौर(मध्यप्रदेश) **************************************************** नई चेतना नव प्रकाश…नई उम्मीदों का आकाश, शुभ संवत्सर नया साल। नए संकल्पों से शुरुआत…प्रायश्चित का प्रयास, शुभ संवत्सर नया साल। अर्घ्य प्रार्थना मंगलाचरण…राम जन्म का अहसास, शुभ संवत्सर नया साल। ब्रह्मा की सृष्टि रचना…झूलेलाल का जन्म महान, शुभ संवत्सर नया साल। प्रचंड सूर्य खुला आसमान…नवरात्र की शुरुआत, शुभ संवत्सर नया … Read more

नेता

राजबाला शर्मा ‘दीप’ अजमेर(राजस्थान) ******************************************************************************************** रोना अभिनय, हँसना अभिनय सुख में अभिनय, दु:ख में अभिनय इतने अभिनय जाने कैसे कर लेते हैं, चेहरे पर ये चेहरा खूब लगा लेते हैं। खाना अभिनय, पीना अभिनय इनके तौर- तरीके अभिनय, देश की जनता को ये मूर्ख बना लेते हैं, चेहरे पर ये चेहरा खूब लगा लेते हैं। … Read more

एक पेड़ लगाएं,पर्यावरण बचाएं

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** हरे-भरे उपवन का बन जाये, हर घटक राष्ट्र का माली। क्लेश काल का बने ग्रास नित, काल निशा हो कभी न काली। लेकर के संकल्प आज हम, एक-एक पेड़ लगाएं पर्यावरण बचाएं। वन जब घटा है बड़ा है प्रदूषण, जन-जन में फैली है बीमारी भीषणl यह संताप मिटाएं, आओ एक … Read more

स्वर्ग की तलाश खत्म हो गई

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** ‘प्रेम’ को बचाने की जद्दोजहद में, मिटता जा रहा है प्रेम मिट रहा है अपनत्व,स्नेह माता-पिता और बच्चों के बीच, दादा-दादी और नाती-पोतों के बीच पति-पत्नी और बच्चों के बीच, भाई-बहन और परिवार के बीच शहर में मकान बढ़ते जा रहे हैं, घर हो रहे हैं लापताl चलो! … Read more

जीवनसाथी

अविनाश तिवारी ‘अवि’ अमोरा(छत्तीसगढ़) ************************************************************************ तू प्रेम है श्रद्धा है मेरा विश्वास है, प्रिये साथ तेरा हरपल मधुमास है। कर समर्पण जीवन का पल, प्रतिपल मुझे सँवारा है मान तू अभिमान मेरा हृदय तेरा सुवास है, प्रिये साथ तेरा हरपल मधुमास है। तू शीतल चाँदनी तपती धूप में छांव है, रिश्तों की कोमलता का तुझसे … Read more

नव संवत्सर

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** हे पुण्य श्लोक नव संवत्सर समय-शिखर से झरते निर्झर, कर ऊर्जा से वसुधा पूरित क्षण-क्षण अविरल गति को संचर। सौंदर्य प्रकृति का उर में भर जाए जग-जीवन और निखर, युग-अंध तमस को दूर करे उगते दिनकर की किरण प्रखर। हैं खिले फूल कितने सुन्दर चूमें लतिका उन्नत तरुवर, बह शीतल … Read more