…पर कल तो हमारा है

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* नहीं है आज सिर पे ताज,पर कल तो हमारा है।चलें देखें समंदर का कहां दूजा किनारा है। सजी मंदिर की मूरत बोल सकती है अगर चाहो,लगे उसको किसी ने आज अंदर से पुकारा है। नुकीली धार पानी की जमा पर्वत हिला देती,सभी नदियों ने अपना रास्ता खुद ही निखारा है। जरा-सी … Read more

रखवाले,अब से नहीं जमाने से हैं

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* बागों के माली रखवाले,अब से नहीं जमाने से हैं।कलियों पर काँटों के ताले,अब से नहीं जमाने से हैं। मिली कहाँ पूरी आजादी,खंडित हिंदुस्तान मिला है,सरहद पर शोणित के नाले,अब से नहीं जमाने से हैं। वातावरण आज भारत का,घुटन भरा बतलाते हैं जो,विषधर असली वो ही काले,अब से नहीं जमाने से हैं। … Read more

मंज़र नहीं देखा गया

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* आ गया वो रूह में मंज़र नहीं देखा गया।पूजते पत्थर रहे अंदर नहीं देखा गया। आत्म मंथन के सफ़र में देह से ऊपर उठा,पार गरदन के गया तो सर नहीं देखा गया। देह में वो साथ था पर हम ही लापरवाह थे,जाम पीते रह गए,रहबर नहीं देखा गया। छोड़ कर भागा … Read more

किरदार बोलता है

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ थी नफ़रत या प्यार बोलता है।सच क्या है क़िरदार बोलता है। सच्चा हूँ या झूठा कौन बोलता है।ग़ज़ल में सब अशआर बोलता है। हम कैसे रहते हैं समाज में,इसका सच संसार बोलता है। बिन झूठ सच की परवाह किये,रोज़ बिन डरे अख़बार बोलता है। बज़्म में किसका कितना सम्मान है,ये उसके गले का … Read more

तुम्हीं किताबे वफ़ा हो

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) **************************** न कोई शिकवा किया करेंगे न रंज दिल का कहा करेंगे।तुम्हारे ग़म के ह़सीं ‘चमन में उदास तन्हा जला करेंगे। तुम्हीं को हँस कर पढ़ा करेंगे तुम्हीं को पढ़ कर हँसा करेंगे।तुम्हीं किताबे वफ़ा हो दिलबर तुम्हीं को हर पल तका करेंगे। सितम की ह़द से गुज़रने वाले तुझे नज़र से … Read more

किरदार बौना हो गया

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* आदमी का आजकल किरदार बौना हो गया है।जिंदगी का फलसफा अब तो ‘करोना’ हो गया है। ढो रहा है आदमी कांधे सगों की लाश यारों,मरघटों तक लाश लाना बोझ ढोना हो गया है। जो कभी सरदार थे सालिम हमारे गाँव भर के,रोग के कारण ठिकाना एक कोना हो गया है। पक्ष … Read more

वक़्त दिखायेगा आईना

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ जीवन में मिलता मक्कार क्यों है।होते दोगले उसके व्यवहार क्यों है। बेचारी मासूम मछली काँटे में फंस गई,जिंदा होती मछली शिकार क्यों है। लूटने के लिये ज़ालिम ढूँढते भोले-भालों को,इंसानी सूरत में रहते खूँखार क्यों हैं। ख़ुदा कब फ़ना करेगा इन वहशियों को,जिनकी बातों में रहता हथियार क्यों है। गुड़ जैसी मीठी जुबाँ … Read more

परेशानी,सुनो सारे जहां में है

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* गरीबी भूख वीरानी सुनो सारे जहां में है।अमीरों की कद्रदानी सुनो सारे जहां में है। कहीं थोड़ा कहीं ज्यादा कहीं पूरा कहीं आधा,दुखी की आँख में पानी सुनो सारे जहां में है। कहीं आतंक डेरा है कहीं नस्ली बसेरा है,जहालत से परेशानी सुनो सारे जहां में है। किसी का हाल खस्ता … Read more

बहुत मुमकिन

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचना शिल्प:क़ाफ़िया-अना,रदीफ़-मुमकिन मिरा,बहर २१२२,२१२२,२१२२,२१२ हो जुदा उनसे तड़पना है बहुत मुमकिन मिरा।याद में उनकी मचलना है बहुत मुमकिन मिरा। गर्म साँसों की चुभन आती है मुझको याद जब,उसकी यादों से गुजरना है बहुत मुमकिन मिरा। आलम-ए-तनहाई ने खामोश मुझको कर दिया,हो दिवानावार अब है बहकना मुमकिन मिरा। जिस तरह से जिक्र … Read more

तेरी रज़ा के चराग़

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)******************************************* उमीद के रखें हम दिल में यूँ सजा के चराग़,हवा में जैसे रखे जाते हैं जला के चराग़। सभी के हक़ में दुआ आइए यही मांगे,वबा ये अब न बुझाए किसी बक़ा के चराग़। इसी के रहम-ओ-करम पर है ज़िंदगी इनकी,जलें-बुझें कहाँ मर्ज़ी बिना हवा के चराग़। हो अज़्म … Read more