आयुर्वेद के अनुसार जनपदोध्वंस से बचाव ही इलाज

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** वर्तमान में जिस `कोरोना` नामक रोग के संक्रमण से पूरा विश्व भयाक्रांत है,और निरंतर जीवन-मृत्यु से संघर्ष कर रहे हैं,इसके सम्बन्ध में आयुर्वेद में बहुत व्यापक दृष्टि से वर्णन किया है,जो वर्तमान में जानना बहुत जरूरी है- `तमुवाच भगवानात्रेय —-एवंसमनेवतामप्येभिरगिनवेश ! प्रकृत्यादिभोरवामणुष्याणां येन्ये भावाः सामन्यास्तद्वयगनताय समानकालः समानलिंगाश्च व्याधायोअभिनिवरर्माणा जनपदमुद्धवनश्यन्ति .ते खलिवमे … Read more

`दोहन` नहीं,प्रकृति का पालन-पोषण आवश्यक

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** प्रकृति और मानव स्पर्धा विशेष…….. मनुष्य सदियों से प्रकृति की गोद में पलता रहा हैl मानव और प्रकृति के बीच बहुत गहरा संबंध है। दोनों एक-दूसरे के पूरक ही नहीं,बल्कि एक-दूसरे पर निर्भर है। वास्तव में तो मनुष्य प्रकृति का ही अंग है। प्रकृति हमें जो देती है,वह अमूल्य है उसे … Read more

जीत एक लंबे संघर्ष की

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** तारीख पे तारीख,फिर तारीख,तारीख ही तारीख..२६५१ दिन(सात वर्ष तीन माह चार दिन)लम्बा यह तारीखों का सिलसिला २० मार्च की सुबह साढ़े ५ बजे तब थम गया,जब निर्भया के चारों दरिंदे हत्यारे फाँसी के फंदे पर चढ़ा दिए गए। १६ दिसम्बर २०१२ का वो काला दिन,जब गुनहगार उस ‘निर्भया’ का सम्मान … Read more

मरणरेखा कब है ?

अनिल जोशी  ******************************************************** श्रद्धांजलि मेरी पुस्तक `प्रवासी लेखन:नयी जमीन,नया आसमान` की पांडुलिपि तैयार थी। पुस्तक की भूमिका किसी वरिष्ठ लेखक से लिखवाने के लिए सोच रहा था। प्रवासी साहित्य में सुषम बेदी के योगदान को देखते हुए लगा,वही इस कार्य के लिए सर्वाधिक उपयुक्त रहेंगी। ब्रिटेन में जल्दी ही पुस्तक का लोकार्पण होना था। मैं … Read more

संदेश है प्रकृति का

पवन प्रजापति ‘पथिक’ पाली(राजस्थान) ************************************************************************************** सृष्टि के प्रारम्भ में प्रकृति ने जब सभी जीवों की रचना की तो दो पैरों वाले जीव ‘इंसान’ को सबसे अधिक ताकत ‘दिमागी ताकत’ दी। प्राकृतिक संसाधनों का अकूत खजाना उसे सौंपा,साथ ही सब जीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी उस दो पैरों वाले जीव को दी, लेकिन समय के … Read more

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा जगत का ‘उत्पत्ति दिवस’

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** वर्ष प्रतिपदा-२५ मार्च विशेष…………….. `चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि।                                           शुक्लपक्षे समग्रं तु तदा सूर्योदय सति॥`  हेमाद्रि के ब्रह्मपुराण के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन सूर्य उदय के … Read more

भारत जीतेगा ही `कोरोना` युद्ध

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** `जनता-कर्फ्यू` की सफलता अभूतपूर्व और एतिहासिक रही है। पिछले ६०-७० साल में कई भारत बंद देखे हैं,लेकिन ऐसा भारतबंद पहले कभी नहीं देखा। इस पहल का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो है ही,इस जनता-कर्फ्यू ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि श्री मोदी से बड़ा प्रचार मंत्री पूरी … Read more

हिन्दी के योद्धा:डॉ. राम मनोहर लोहिया

डॉ. अमरनाथ ***************************************************************** डॉ. राम मनोहर लोहिया (१९१०-१९६७) आजाद भारत के अकेले राजनेता हैं,जिन्होंने अपनी भाषा के मुद्दे पर राष्ट्रीय संदर्भ में विचार किया और आंदोलन भी चलाए, क्योंकि वे मानते थे कि बिना भाषा के लोकतंत्र गूंगा-बहरा है। डॉ. लोहिया के भाषा संबंधी चिंतन में वर्णमाला से लेकर उसकी शिक्षा और शोध तथा भारतीय … Read more

क्या `मेडिकल क्वारेंटाइन` भी वास्तव में ‘सूतक’ ही ?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** जिस देश ने दुनिया को ‘क्वारेंटाइन’ जैसा शब्द दिया,उसने शायद ही सोचा होगा कि `कोरोना` वायरस जैसी वैश्विक महामारी से उसी देश में चीन के बाद सबसे ज्यादा लोगों की मौतें होंगी और लगभग पूरे देश को क्वारेंटाइन में जाना पड़ेगा। यूरोप में इटली,कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन … Read more

‘कोरोना’ से ध्वस्त होती अर्थ-व्यवस्थाएं

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* विकसित एवं शक्तिसम्पन्न राष्ट्रों ने दुनिया में अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए नए तरह के युद्धों को इजाद किया है,उनके भीतर नयी तरह की क्रूरता जागी है,उन्होंने दुनिया को विनाश देने के नए साधन विकसित किए हैं,जिससे अनेक बुराइयां एवं संकट बिन बुलाए दुनिया में व्याप्त हो गई। इसी विकृत … Read more