क्या भारत के ५४५ प्रधानमंत्री ?
डॉ. देविदास प्रभु ************************************************* (विशेष-वे तमाम हिंदी क्षेत्र के लोग,जो अपने स्वार्थों के लिए संविधान की अष्टम अनुसूची के माध्यम से हिंदी को बोलियों में टुकड़े-टुकड़े करने पर आमादा हैं,वे तमाम लोग जो अज्ञानवश,क्षेत्रीयतावादी सोच मतबैंक की राजनीति या अन्य किसी कारण से भारत के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रभाषा या राजभाषा के विरुद्ध किसी … Read more