नेह नीर मन चाहत

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (रचनाशिल्प:१६,१२ मात्राएँ,चरणांत में गुरु गुरु,२२,२११,११२,या ११११) ऋतु बसंत लाई पछुआई,बीत रही शीतलता। पतझड़ आए कुहुके,कोयल,विरहा मानस जलता। नव कोंपल नवकली खिली है,भृंगों का आकर्षण। तितली मधु मक्खी रस चूषक,करते पुष्प समर्पण। बिना देह के कामदेव जग,रति को ढूँढ रहा है। रति खोजे निर्मल मनपति को,मन व्यापार बहा है। वृक्ष बौर से … Read more

आतंकवाद एक खतरा

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* खतरा बना आज यह भारी,विश्व प्रताड़ित है सारा। देखो कर लो गौर मानवी,मनु विकास इससे हारा। देश-देश में उन्मादी नर,आतंकी बन जाते हैं। धर्म वाद आधार बना कर,धन-दौलत पा जाते हैं। भाई-चारा तोड़ आपसी,सद्भावों को मिटा रहे। हो,अशांत परिवेश समाजी,अपनों को ये पिटा रहे। भय-आतंकवाद का खतरा,दुनिया में मँडराता है। पाक … Read more

आजादी के थे दीवाने

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** चंद्रशेखर आजाद शहीद दिवस स्पर्धा विशेष……….. आजादी के थे दीवाने, नाम चन्द्रशेखर आजाद। बलिदानी मानव को हम भी, आओ कर लें कुछ पल यादll काकोरी में ट्रेन डकैती, भरी खजाने को दी खोल। निर्भय रहते डरे नहीं वो, भारत माता की जय बोलll छोटा-सा बालक जब थे वो, … Read more

मधुमास

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** झूम चली मधुमास लिये यह गंध भरी पछुवा मतवाली, रंग भरे बहु फूल खिले गुलजार हुई तरु की हर डाली, किन्तु उदास रहे मन आज वियोग सहे चुभती यह बाली, साजन छोड़ गये परदेश लगे सब सून हुआ घर खाली। परिचय–वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। जन्म … Read more

सर पे कफन बांध कर चले

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ***************************************************************************** आज देश है पुकारता, दुश्मनों को है ललकारता। साथियों चलो संवर के आज, माटी की सौगंध ले चले॥ इस देश से आतंक मिटाना, दुश्मनों को मार भगाना। जी-जान से इस देश की रक्षा, करने को प्राण हाथ ले चले॥ देश का झंडा चूमे गगन, ऊंचाइयों को छू ले यह चमन। … Read more

स्वदेश महान

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (रचनाशिल्प:जगण,जगण १२१,१२१-६ वर्ण,८ मात्रा,दो-दो चरण सम तुकांत,चार चरण का एक छंद) करें जय गान! शहादत शान! सुवीर जवान! स्वदेश महान! करें गुण गान! सुधीर किसान! पढ़े इतिहास! बचे निज त्रास! धरा निज मात! प्रणाम प्रभात! पिता भगवान! सदा सत मान! रहे यश गान! स्वदेश महान! प्रवीर जवान! सुधीर किसान! परिचय : बाबूलाल … Read more

मीरा

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* गिरिधर के प्रेम में दिवानी, मीरा बनी बावरी। जोगन बनकर फिरती जग में, दिवस और विभावरी॥ कान्हा की मूरत को लेकर, ध्यान उसका ही करे। हाथों में इकतारा लेकर, गुणों बखान का करे॥ फिरती दर-दर जोगिन बनकर, भक्ति करती कान्ह की। मोर पंख कांधे पर झोली, दासी बनी श्याम की॥ … Read more

कल

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (रचनाशिल्प:मापनी-२१२२ २१२२,४ चरण का छंद है-दो दो चरण सम तुकांत हो चरणांत में,२२,या २११ हो,चरणारंभ गुरु से अनिवार्य है,३,१०वीं मात्रा लघु अनिवार्य) काल से संग्राम ठानो! साहसी की जीत मानो! आज आओ मीत सारे! काल-कल बातें विचारे! सोच ऊँची बात मानव! भाव होवें मान आनव! आज है तो कल रहेगा! सोच … Read more

अमर रहे गणतन्त्र हमारा…

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** गणतंत्र दिवस स्पर्धा विशेष……… अमर रहे गणतन्त्र हमारा, जन-गण-मन का नारा है। आसमान पर देख तिरंगा, विश्व गगन का तारा हैll सदियों से हम ठोकर खाएँ, मिली आज आजादी ये। चलो सहेजें अपनी धरती, अब मत हो बर्बादी येll वसुंधरा माँ की आँचल को, हमने आज सँवारा है। … Read more

प्यारा वतन

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* गणतंत्र दिवस स्पर्धा विशेष……… हमें वतन से प्यार बहुत है, हम इसके रखवाले हैं। भारत माता के बेटे हैं, हम सच्चे दिलवाले हैं॥ वतन के लिए जीना हमको, सब-कुछ वतन हमारा है। मातृभूमि की रक्षा खातिर, मरना हमे गवाँरा है॥ वतन हमारी आन-बान है हैं हम सब हिंदुस्तानी। उसका अस्तित्व … Read more