प्यार मुहब्बत से रहो

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************************** देश हमारा एक है,जिसका भारत नाम। प्यार मुहब्बत से रहो,नफरत का क्या काम॥ डर ही तो है आपका,कुछ का कारोबार। दुनिया यारों हो गयी,एक बड़ा बाज़ार॥ गाली देते फिर रहे,सबको बारम्बार। मुझको उनका लग रहा,नफरत कारोबार॥ किरदारों पर ठीक से,करिये ज़रा विचार। अच्छों को ही दीजिये,वोटों का … Read more

नारी का देवत्व

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** नारी सच में धैर्य है,लिये त्याग का सार। प्रेम-नेह का दीप ले,हर लेती अँधियार॥ पीड़ा,ग़म में भी रखे,अधरों पर मुस्कान। इसीलिये तो नार है,आन,बान औ’ शान॥ नारी तो है श्रेष्ठ नित,हैं ऊँचे आयाम। इसीलिये उसको ‘शरद’,बारम्बार प्रणाम॥ नारी ने नर को जना,इसीलिये वह ख़ास। नारी पर भगवान भी,करता है … Read more

राग रंग है हर तरफ

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** होली- होली की अब धूम है,खेले राधे श्याम। बरसाना की कुंज में,ग्वाल बाल बलराम॥ रँगीला- श्याम रँगीला साँवरा,राधा रानी संग। भर पिचकारी मारते,भीगे सारी अंग॥ अबीर- रंग अबीरा ले चले,खेले होली फाग। नंद गाँव के छोकरे,छेड़े प्रियतम राग॥ उत्सव- उत्सव की अब धूम है,मन में है उल्लास। राग … Read more

रंग प्रीत के

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** रंग प्रीत के डाल के,मले गुलाली माथ। खेल रहे होली यहाँ,राधा मोहन साथ॥ बरसाना में धूम हैं,नाच रहे सब ग्वाल। गोप गोपियाँ मल रहे,रंगों से हैं गाल॥ पिचकारी हाथों लिए,दौड़ा दौड़ा जाय। छोटा कान्हा राधिका,प्रीत रंग बरसाय॥ होली आई प्रीत के,दुश्मन होते मित्र। रंगों की बौछार से,बने रँगीले … Read more

फागुन के रंग

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** मुदित श्याम सुंदर वदन,दर्शन मन अभिलास। मुरली कान्हा हाथ में,खड़ी राधिका पासll कान्हा रंगरसिया बने,ले पिचकारी हाथ। गोप गोपियाँ साथ में,खेले राधानाथll भींगे तन सतरंग से,लेपित लाल गुलाल। रंग लगायी राधिका,गाल लाल गोपालll सुन राधे अब तो रुको,बहुत लगायी रंग। भागो मत मनप्रीत तू,तुझे पिलाऊँ भंगll गिरिधर तू … Read more

साजन

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** साजन से सजनी कहे,मिलने को बेताब। मन मेरा लगता नहीं,देखे सुन्दर ख्वाब॥ आया मौसम प्यार का,बिखरे रंग अनेक। साजन प्यारा है लगे,वो लाखों में एक॥ साजन बिन सजनी नहीं,इक-दूजे का साथ। कस्में-वादें कर चले,लेकर अपने हाथ॥ सपने सुन्दर साजते,साजन सजनी संग। मीठा-सा अहसास है,पुलकित होते अंग॥ चैन नहीं … Read more

होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** रंगों के सँग खेलती,एक नवल-सी आसl मन में पलने लग गया,फिर नेहिल विश्वासll लगे गुलाबी ठंड पर,आतपमय जज़्बातl प्रिये-मिलन के काल में,यादें सारी रातll कुंजन,क्यारिन खेलता,मोहक रूप बसंतl अनुरागी की बात क्या,तोड़ रहे तप संतll बौराया-सा लग रहा,देखो तो मधुमासl प्रीति-प्रणय के भाव का,है हर दिल में वासll अपनापन … Read more

झूठ हँस रहा आज

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** सच्चाई रोने लगी,झूठ हँस रहा आज। दर्पण में वह अक्स है,जैसा दिखे समाजll कानूनों को रोंदकर,आगे बढ़ता काल। शांति नहीं,हैं आजकल,रोज़ नये जंजालll बहकावे अस्तित्व में,सच विलुप्त है आज। निर्लज्जी इंसान को,किंचित भी ना लाजll बाहर सब कुछ स्वच्छ है,भीतर व्यापक मैल। कर मक्कारी भाग लो,पकड़ो पतली गैलll शंका … Read more

मचल रही मनमीत मैं

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** रिमझिम-रिमझिम बारिशें,भीगे-भीगे नैन। मचल रही मनमीत मैं,आलिंगन निशि रैन॥ मंद-मंद शीतल पवन,हल्की मीठी धूप। लहराती ये वेणियाँ,चन्द्रमुखी प्रिय रूप॥ काया नव किसलय समा,गाल बिम्ब सम लाल। नैन नशीली हिरण-सी,मधुरिम बोल रसाल॥ चली मचलती यौवना,मन्द-मंद मुस्कान। खनक रही पायल सुभग,नवयौवन अभिमान॥ लहर दुपट्टा लालिमा,कजरी नैन विशाल। पीन पयोधर तुंग … Read more

लहरे ध्वजा तिरंग

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** दौलत है ऐसी नशा,क्या जाने वह पीर। इंसानी मासूमियत,आंखों बहता नीरll निज सत्ता सुख सम्पदा,मानस बस अनुराग। प्रीत न जाने राष्ट्र की,करता भागमभागll बड़बोला बनता फिरा,अहंकार मद मोह। छलता खु़द की जिंदगी,दुखदायी अवरोहll राम नाम अन्तर्मिलन,भक्ति प्रेम संयोग। शील त्याग परमार्थ ही,जीवन समझो भोगll जीवन है सरिता सलिल,लेकर … Read more