बंधुत्व ही हिंदुत्व

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** हर विजयदशमी को याने दशहरे के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया नागपुर में विशेष व्याख्यान देते हैं,क्योंकि इस दिन संघ का जन्म-दिवस मनाया जाता है। इस बार संघ-प्रमुख मोहन भागवत से मैं इस बात से प्रभावित हुआ कि उनकी भाषा याने हिंदी इतनी शुद्ध और सारगर्भित थी कि,दिल्ली में तो ऐसी … Read more

जनता के घावों पर नमक महंगे होते चुनाव

ललित गर्गदिल्ली ****************************************************** चुनाव जनतंत्र की जीवनी शक्ति है। यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रतिबिम्ब होता है। जनतंत्र के स्वस्थ मूल्यों को बनाए रखने के लिए चुनाव की स्वस्थता, पारदर्शिता और उसकी शुद्धि अनिवार्य है। चुनाव की प्रक्रिया गलत होने पर लोकतंत्र की जड़ें खोखली होती चली जाती हैं। चुनाव प्रक्रिया महंगी एवं धन के वर्चस्व … Read more

इंदिरा गाँधी:मौत की असली वजह अब भी रहस्य

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)********************************************* पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखने वाली भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी समय से पहले इस दुनिया को अलविदा कह गई। इस ३१ अक्टूबर को इंदिरा गाँधी की हत्या को ३६ साल हो जाएंगे। ३६ सालों से इनकी हत्या और उसके बाद हुए सिख-विरोधी दंगों की छाया गाहे-बगाहे चुनावों … Read more

मजहब चलें मध्यम मार्ग पर

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** भारतीय विदेश मंत्रालय ने विशेष कूटनीतिक साहस और स्पष्टवादिता का परिचय दिया है। उसने एक बयान जारी करके तुर्की के राष्ट्रपति तय्यब एरदोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को आड़े हाथों लिया है। भारत सरकार ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मेक्रो का खुलकर समर्थन किया है। मेक्रो ने इधर इस्लामी अतिवाद … Read more

संप्रदाय-पंथ के नाम से अलगाव कब तक ?

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** घुमा-फिरा कर सभी लोग यह स्वीकार करते हैं कि,इस दुनिया को बनाने वाली एक ही शक्ति है।इसके आरंभ की कहानी सभी धर्मों की जो भी हो, सृष्टि का प्रारम्भ जैसे भी हुआ हो,लेकिन सत्य यह है कि सृष्टि का अंत मनुष्य की दुर्बुद्धि और स्वार्थ के कारण फैले प्रदूषण (वैचारिक,पर्यावरण, वातावरण आदि) … Read more

सूची,अनुसूची और साहित्य अकादमी के पुरस्कार!

मुद्दा-अष्टम अनुसूची में स्थान……….. डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ (महाराष्ट्र)–साहित्य अकादमी के पुरस्कार पाने की होड़ एक और संविधान की अष्टम अनुसूची में स्थान पाने की होड़ का रूप ले रही है तो दूसरी ओर कुछ बोलियाँ साहित्य अकादमी की मान्यता के आधार पर अष्टम अनुसूची में स्थान पाना चाहती हैं। इस प्रकार संघ की राजभाषा … Read more

जनहित में धर्ममय राजनीति महती आवश्यक

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** ‘राजनीति’ एक ऐसा क्षेत्र है,जो‌ समाज को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष सर्वाधिक प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में यदि राजनीति की दिशा और दशा सही नहीं होगी तो समाज को भारी क्षति पहुँचेगी। इस कारण धर्मतंत्र को चाहिए कि वह ‘राजनीति’ पर नजर रखे तथा उसके भटकाव को रोके। उसका मार्गदर्शन करे,जन-जागरण करे, … Read more

रावण का पुतला तो फूंक दिया,राक्षसी वृति को कौन फूंकेगा

डॉ.प्रभात कुमार सिंघलकोटा(राजस्थान)************************************ विजया दशमी विशेष…………. सदियों से हम बुराई और राक्षसी वृति के प्रतीक रावण के पुतले का कभी वध कर कभी फूंक कर बुराई का अंत कर दशहरा मनाते आ रहे हैं। रावण का पुतला फूंकना तो बुराई के अंत का प्रतीक मात्र है। दिन-ब-दिन समाज में सुरसा के मुँह की तरह बढ़ … Read more

अष्टम अनुसूची की हिन्दी हित में पुनः समीक्षा अपेक्षित

ओम प्रकाश पांडेयपटना (बिहार)********************************************* विगत आधी सदी से भी कुछ अधिक अवधि से अवलोकन करता आ रहा हूँ कि क्षेत्रीय बोली के नाम पर अधिकतर व्यक्ति,कुछ से कुछ लिखते हुए गुणवत्ता के प्रति सचेत नहीं रहते हैं। फलतः अपेक्षित स्तर का प्रायः अभाव रहता है। विषय-वस्तु,भाव एवं भाषिक रूप से भी और,इसी लिए स्थानीय स्तर … Read more

आजादी रहे,लेकिन कोई लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन न कर पाए

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** देश के ३४ फिल्म-निर्माता संगठनों ने २ टी.वी. चैनलों और बेलगाम जनसंचार माध्यम के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में मुकदमा ठोक दिया है। इन संगठनों में फिल्मी जगत के लगभग सभी सर्वश्रेष्ठ कलाकार जुड़े हुए हैं। इतने कलाकारों का यह कदम अभूतपूर्व है। वे गुस्से में हैं। कलाकार तो खुद अभिव्यक्ति की … Read more