संत तुलसीदास:महान व्यक्तित्व और कृतित्व

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************************************************** महाकवि गोस्वामी तुलसीदास (२४ जुलाई) जयंती स्पर्धा विशेष हिन्दी साहित्यकाश का कविकुल कुमुद कलाधर कविवरेण्य महाकवि गोस्वामी संत तुलसीदास जाज्वल्यमान भास्कर हैं। वे न केवल एक महान् सन्त और भक्ति सागर स्वरूप थे,अपितु वे लोकमंगल के जन-मन सुखदायक समाज सुधारक,दार्शनिक,क्रान्तिकारी प्रचेता और ४० काव्य ग्रन्थों के महान् युगान्तकारी कालजयी … Read more

ई-संगोष्ठी शब्द सर्वथा उचित,स्वीकार और प्रचारित करना चाहिए

मुद्दा-‘वेबिनार बनाम’ अपने शब्द डॉ. रवि शर्मा ‘मधुप'(दिल्ली)- वेबिनार के लिए हिंदी पर्याय पर चल रही परिचर्चा को पूरा पढ़ लेने तथा अपनी बौद्धिक क्षमताओं का प्रयोग करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि ई-संगोष्ठी शब्द सर्वथा उचित होने के कारण अब हमें स्वीकार और प्रचारित करना चाहिएl यह अपने भीतर भविष्य की संभावनाओं … Read more

अभिनव वाल्मीकि गोस्वामी तुलसीदास

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)************************************************************ महाकवि गोस्वामी तुलसीदास (२४ जुलाई) जयंती स्पर्धा विशेष ‘रामबोला,तुलसीराम फिर तुलसीदास। जन्मलग्न से भाग्य का निष्ठुर परिहास!’ पितृस्नेह से वंचित अवहेलित बालक,बारह माह तक माता हुलसी के गर्भ में परिपुष्ट एवं पुर्णदन्तपन्क्ती सह जन्मक्षण से राम नाम उच्चारित करते हुए श्रावण माह का शुक्ल सप्तमी,मूल नक्षत्र में बालक का जन्म हुआ। … Read more

ऐसे शब्द बनाएँ,जो सार्थक होने के साथ-साथ आसानी से चलने की संभावना भी हो

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ मुम्बई(महाराष्ट्र)*************************************************************** मुद्दा-वेबिनार बनाम अपने शब्द कोरोनाकाल में तेजी से उभर कर आए ऐसे माध्यम जहाँ बिना मिले, संवाद,बैठक,संगोष्ठी,कार्यशाला,कक्षा, शिक्षण-प्रशिक्षण,प्रस्तुति व चर्चा आदि हो सकें,उनके लिए अंग्रेजी के अनेक शब्द भी सामने आए हैं जो अब तक भारतीय भाषाओं में प्रचलित शब्दों को भी रौंद सकते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि,हम … Read more

ई-संगोष्ठी ही योग्य शब्द

मुद्दा-वेबिनार बनाम अपने शब्द प्रो.डॉ. अरविन्द कुमार गुप्ता (कर्नाटक)- मेरे विचार में भी ई-गोष्ठी होना चाहिए,क्योंकि हम आमतौर पर सामूहिक परिचर्चा के लिए गोष्ठी शब्द का ही प्रयोग करते हैं और ई का प्रयोग उपसर्ग के रूप में हम एक लंबे समय से तकनीक के प्रयोग के लिए करते आ रहे हैंl जैसे- डिजिटल पुस्तक … Read more

ईश्वर ही जाने सारे गूढ़ रहस्य

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* मानव जन्मजात पागल ही तो है। जब जानता है कि साँसें गिनती की हैं और अपना शरीर भी अपना नहीं है,तो ऐसे में दूसरों पर भरोसा करना,पागलपन नहीं तो और क्या है ? सत्य से कब तक मुँह फेरेगा ? सत्य यह है कि समस्त सृष्टि के मानव … Read more

सभी जीवों पर दया करें

श्रीमती अर्चना जैनदिल्ली(भारत)**************************** आजकल हर मनुष्य भौतिकता के युग में जी रहा है,और अपनी हर इच्छा को पूर्ण करना वह अपना कर्तव्य समझता हैl इस इच्छा को पूर्ण करने के चक्कर में वह ये भी भूल जाता है कि हम जो खा रहे हैं,पी रहे हैं,अथवा प्रयोग कर रहे हैं,कहीं वो सामान किसी जीव को … Read more

ई-संगोष्ठी जैसा सटीक शब्द दिया जाना उचित

मुद्दा-वेबिनार बनाम अपने शब्द प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी (दिल्ली)- कुछ लोग वेब-संगोष्ठी की वकालत कर रहे हैं,लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए कि वेब भी इलेक्ट्रोनिक के अंतर्गत आता है। हमें अंशी को अपनाना चाहिए,न कि अंश को, ताकि भविष्य में कोई कठिनाई या उलझन न आ पाए। इस प्रकार आज के तकनीकी युग में इलेक्ट्रोनिक … Read more

अनिवार्य मातृभाषा हो तो हिंदी बने राष्ट्रभाषा ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** भारत में उत्तरप्रदेश हिंदी का सबसे बड़ा गढ़ है लेकिन देखिए कि हिंदी की वहां कैसी दुर्दशा है। इस साल दसवीं और बारहवीं कक्षा के २३ लाख विद्यार्थियों में से लगभग ८ लाख विद्यार्थी हिंदी में अनुतीर्ण हो गए,डूब गए। जो पार लगे,उनमें से भी ज्यादातर किसी तरह बच निकले। प्रथम श्रेणी … Read more

ई-संगोष्ठी का उपयोग बेहतर

मुद्दा-वेबिनार बनाम अपने शब्द बलदेवानन्द सागर- डॉ.एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ ने वेबिनार के लिए ई-संगोष्ठी का परामर्श दिया हैl चूँकि,मैं संस्कृत-साहित्य और संस्कृत-पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करता हूँ इसलिए निवेदन करना चाहूँगा कि संचाररोध (लॉकडाउन) के समय में बहुतायत प्रयुक्त इस शब्द के लिए ‘अंतर्जालीय संगोष्ठी’ या ‘ई-संगोष्ठी’ का प्रयोग प्रमुख रूप से किया जा … Read more