लालजी टंडन:राजनीति में नैतिक मूल्यों के एक युग की समाप्ति

ललित गर्गदिल्ली ******************************************************************* उत्तरप्रदेश की राजनीति के शीर्ष व्यक्तित्व एवं मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का ८५ वर्ष की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। उनका निधन न केवल उत्तर प्रदेश,देश की राजनीति बल्कि भाजपा के लिए बड़ा आघात है,अपूरणीय क्षति है। उनके निधन को राजनीति में चारित्रिक एवं नैतिक मूल्यों के एक युग … Read more

ई-संगोष्ठी शब्द उपयुक्त

मुद्दा-वेबिनार बनाम अपने शब्द प्रो.शैलेंद्र शर्मा(उज्जैन)- मैं राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का ही प्रयोग करता हूँ,यही उपयुक्त है। जैसे वेब पत्रिका,वेब पत्रकारिता,वेब मीडिया शब्द बहुप्रचलित हैंl विज्ञानव्रत- संजाल संगोष्ठी यह नाम बहुत अच्छा हैl हरिसिंह पाल- मेरी असहमति है। ई एक माध्यम के रूप में प्रयुक्त होता है। यह द्वमार्गी व्यवस्था नहीं है जबकि,संगोष्ठी संवादी व्यवस्था … Read more

क्या गुरू…! फिर तालाबन्दी…

तारकेश कुमार ओझाखड़गपुर(प. बंगाल ) ********************************************************** जो बीत गई उसकी क्या बात करें,लेकिन जो बीत रही है उसे अनदेखा भी कैसे और कब तक करेंl ऐसा डरा-सहमा सावन जीवन में पहली बार देखा,लोग पूछते हैं…क्या कोरोना काल में इस बार रक्षाबंधन और गणेशोत्सव भी फीके ही रह जाएंगेl यहां तक कि,खतरनाक विषाणु की अपशकुनी काली … Read more

अखियाँ दर्शन को प्यासीं…

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* ‘दृष्टि जिसे हम आँख भी कहते हैं हमारे पूरे शरीर को सुरक्षा प्रदान करती है और उस दृष्टि को बहुपयोगी बनाता है दर्शनशास्त्र, जिसे हमें पढ़ने,समझने और अपने जीवन में उतारने की जरूरत है,तभी हम जीवन का आनंद और दुनिया को सही अर्थ में समझ पाएंगे!’इस जिज्ञासा या व्याख्या … Read more

नागालैंड में श्वान माँस पर प्रतिबंध…खाद्य फासीवाद कैसे ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** बिग बी को कोरोना,चीनी दबंगई और विकास दुबे मुठभेड़ से परे सुदूर पूर्वोत्तर के राज्य नागालैंड में राज्य सरकार द्वारा कुत्ते (श्वान) के माँस पर प्रतिबंध को लेकर बवाल मचा है। जहां पशु प्रेमियों और पशु हिंसा विरोधियों ने इस फैसले का दिल खोलकर स्वागत किया,वहीं स्थानीय नागा नेता और बुद्धिजीवी इस … Read more

बदलता है रंग आसमाँ भी कैसे-कैसे..

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** बड़े अज़ीब दिन हैं ये और बड़े अजीब हैं ये अहसास…,हर दिन मानो एक नया इम्तहान लेकर सामने आता है और दिलो-दिमाग पर उदासी की एक नई लकीर खींचकर चला जाता है…l इस जद्दोजहद से बाहर निकलने की कोशिश भी कामयाब नहीं होती…,भीतर का अंधेरा बाहर के अंधेरे के … Read more

चीन को सबक सिखाने का वक्त

डाॅ. मधुकर राव लारोकर ‘मधुर’ नागपुर(महाराष्ट्र) ********************************************************************** हिंदी चीनी भाई-भाई नारा १९६२ में लगाया गया था। परिणाम स्वरूप चीन ने हमारे साथ धोखा किया और हमारे देश पर हमला किया। उस समय चीन हमसे मुँह की खाने के बाद भी हमारी सरहदों को निरन्तर हड़पने और अपने फायदे के लिए उपयोग करने का प्रयास करता रहा … Read more

जब तक सही समय न आए,अंकीय शिक्षा बेहतर

प्रियंका सौरभहिसार(हरियाणा) ********************************************************** मानव संसाधन विकास मंत्रालय फिलहाल विद्यालयों को खोलने की जल्दी में कतई नहीं है,लेकिन भारत में कुछ राज्य इन सबके बावजूद भी विद्यालय खोलने की कवायद में जी-जान से जुटे हैं। पता नहीं,उनकी क्या मजबूरी है ? लगता है वो विद्यालय माफियाओं के दबाव में है। आपातकालीन स्थिति में इस तकनीकी युग … Read more

भारत में सच्चा लोकतंत्र जरूरत

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** लोग पूछ रहे हैं कि,भारत को सच्चा लोकतंत्र कैसे बनाएं ? कुछ सुझाव दीजिए। सबसे पहले देश की सभी पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र हो,याने किसी भी पद पर कोई भी नेता बिना चुनाव के नियुक्त न किया जाए। पार्टी के अध्यक्ष तथा सभी पदाधिकारियों का सीधा चुनाव हो,गुप्त मतदान द्वारा। दूसरा, किसी … Read more

हिंदी का शब्द रखा जाए

मुद्दा-वेबिनार बनाम अपने शब्द प्रो. विमलेश कांति वर्मा (दिल्ली)- यह आवश्यक है कि हिंदी में वेबिनार के बजाए हिंदी का शब्द रखा जाए। इस समय जबकि सभी स्तरों पर बड़ी संख्या में वेबसाइट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से संगोष्ठी आयोजित की जा रही है तो इस समय वेबिनार के बजाय हिंदी में इसके सर्वमान्य पर्याय को … Read more