हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं में वेबिनार की क्या दरकार ? अपना शब्द क्यों न अपनाएँ

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ मुम्बई(महाराष्ट्र)*************************************************************** कोरोना के संक्रमण काल में अचानक अनेक इलैक्ट्रॉनिक माध्यमों द्वारा संगोष्ठियों का आयोजन किया जाने लगा है और अंग्रेजी की तर्ज पर इन संगोष्ठियों को हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी वेबिनार कहा जाने लगा है। अगर अभी नहीं जागे,तो वेबिनार हमारे संगोष्ठी शब्द को भी ले बैठेगा। इसलिए … Read more

चीनी-हिन्दी भाई नहीं रहे

जीवनदान चारण ‘अबोध’  पोकरण(राजस्थान) ****************************************************************** पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित विश्व के २ महान देश,जिनका नाम लेते ही विश्व पटल पर स्थित जनमानस का ख्याल आता हैlजनसँख्या से लबरेज विश्व के चोटी के राष्ट्र हर समय वैश्विक मामलों में हस्तक्षेप करने वाले,लोगों को संकट से निपटने का पाठ पढ़ाते हुए सही पथ प्रदान करने वाले देश, आज … Read more

महत्वाकांक्षा-सम्मान न मिलना मानसिक रोग तो नहीं!

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** वर्तमान राजनीति महत्वाकांक्षा और सम्मान न मिलना यानी अपमान इस समय राजनीति में बहुत अधिक प्रचलन में है। ऐसा कौन व्यक्ति होगा,जिसकी सभी महत्वाकांक्षा पूरी हुई होगी और ऐसा कौन व्यक्ति न होगा जिसकी कभी बेइज्जती न हुई हो। व्यक्ति जन्म लेता है,यदि वह घर में बड़ा हुआ और उसके छोटे भाई-बहिनों ने … Read more

राष्ट्रवाद ही भारतीयता

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* हर देशवासी कहता है कि उसे अपनी मातृभूमि से,अपनी मिटटी से प्रेम है,किन्तु क्या हम वाकई अपनी मातृभूमि से प्रेम करते हैं या सिर्फ छद्म देशभक्ति का लबादा ओढ़े रहते हैं। वैश्वीकरणके इस दौर में देशभक्ति एवं राष्ट्रीयता के मायने बहुत संकुचित हो गए हैं। १९४७ में कहने को तो हम … Read more

अपराध-विकास:आँख खोलती है घटना

९ जुलाई की सुबह टेलीविजन पर दिखाई पड़ा कि कानपुर के पास के बिकरू गाँव का विकास दुबे,जिसने ८ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी और भागा-भागा फिर रहा था,को उज्जैन के महाकाल मंदिर से निकलते समय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। और उसे थाने ले जाया गया। दुबे की गिरफ्तारी की बात सब जगह … Read more

मजदूरों की राहत बढ़ाएं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** तालाबंदी के दौरान जो करोड़ों मजदूर अपने गाँवों में लौट गए थे,उन्हें रोजगार देने के लिए सरकार ने महात्मा गांधी रोजगार योजना (मनरेगा) में जान डाल दी थी। सरकार ने लगभग साढ़े ४ करोड़ परिवारों की दाल-रोटी का इंतजाम कर दिया था,लेकिन इस योजना की ३ बड़ी सीमाएं हैं। एक तो यह … Read more

मातृभाषा में शिक्षा की वकालत की विश्वसनीय आवाज़ प्रो. जोगा सिंह-प्रो. अमरनाथ,कलकत्ता

प्रो. जोगा सिंह वास्तव में हिन्दी के योद्धा नहीं हैं,उनकी मातृभाषा पंजाबी है। वे मातृभाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और उन्होंने अपने जीवन का यही मिशन बना लिया है। यदि ऐसा होता है तो देश के ९९ प्रतिशत विद्यार्थियों को फायदा होगा। इससे सबसे ज्यादा फायदा हिन्दी को मिलेगा, … Read more

चीन एवं चंदे पर ओछी राजनीति

ललित गर्गदिल्ली ******************************************************************* गलवान घाटी घटना पर देश में इन दिनों जमकर राजनीति हो रही है,विभिन्न शीर्षस्थ राजनीतिक दल फौज का मनोबल गिराने वाले बयान दे रहे हैं। ऐसा लग रहा है गलवान घाटी में भारत की मुठभेड़ चीन से हुई,लेकिन असली दंगल भाजपा और कांग्रेस के बीच हो रहा है। दोनों दल एक-दूसरे पर … Read more

अवसाद क्यों…हर क्षण का मजा लें

गरिमा पंत लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************* अवसाद(डिप्रेशन) क्यों होता है ? यह बहुत ही विचारणीय प्रश्न है। जब कोई दु:ख में डूब जाता है,सारी दुनिया उसे काली लगने लगती है,तब व्यक्ति को कुछ भी अच्छा नहीं लगता है,तब इसे माना जाता है। अवसाद का अर्थ मनोभावों से सम्बन्धी दुःख से होता है। अधिकतर यह देखा गया है कि … Read more

पाक व अमेरिका:दुश्मनी के डमरु

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** गलवान घाटी को लेकर चल रहे भारत-चीन तनाव पर २ संवाद अभी-अभी ऐसे हुए हैं,जिन पर विदेश नीति विशेषज्ञों का ध्यान जाना जरुरी है। एक तो अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियों और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के बीच,एवं दूसरा चीनी विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के … Read more