कोरोना:यही समय हिंदी के बढ़ावे का

डॉ. ओम विकास******************************************** ‘कोरोना’ काल में मीडिया में सबसे अधिक हिन्दी का प्रयोग हुआ है। शिक्षा,परीक्षा, प्रतियोगिता और विज्ञान-प्रौद्योगिकी,सेमिनार -वेबिनार में हिन्दी के प्रयोग पर बल दिया जाए। आँकड़े निकालिए कि इनमें हिन्दी का प्रयोग कितने प्रतिशत हो रहा है। इसके आधार पर विपक्ष से प्रश्न कराइए। इनके सुधारते ही सब सुधरने लगेगा।कोरोना संकट में … Read more

वरिष्ठों की त्रासदी-कैसे उबरें!

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* ‘वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।तथा शरीराणि विहाय जीर्णा- न्यन्यानि संयाति नवानि देही॥ भावार्थ-जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता है,वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्याग कर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होता है।’ (श्रीमद्भगवद्गीता २/२२)‘कोरोना’ महामारी के चलते चार बार … Read more

श्रुतिमधुर शब्दोंके चितेरे महाकवि कालिदास

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)************************************************************ जयतु: महाकवि कालिदास।सुदीर्घकाल से निरंतर परिश्रम करते हुए चयन किए गए सुंदर,श्रुतिमधुर एवं अर्थवाहक शब्दों का जाल बुनकर साहित्य को रचित या सृजित किया जाता है। नीरस शब्दों को मधुमय रसासिक्त कर साहित्य को श्रुतिमधुर किया जाता है। सिर्फ गुणीजनों के कारण व साधना से सुंदर साहित्य प्रकाशित होता है। जैसे … Read more

किसी छलावे में न आएं

मुद्दा:भारत को भारत कहो, इण्डिया नहीं-कुछ विचार व सुझाव अरुणी त्रिवेदी- आज से लगभग ११००० वर्ष पूर्व ऋषभदेव पुत्र भरत हुए थे। उनका दूसरा नाम बाहुबली भी था। आज भी बाहुबली की विशाल मूर्ति कर्नाटक में है। ‘बाहुबली’ नाम की फिल्म भी थोड़ा बहुत उस कहानी में अन्य बातें जोड़कर बनाई गई है जो अपने … Read more

राष्ट्र विरोधी मानसिकता त्याग लोकतंत्र की चतुर्थ आँख बनना चाहिए

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************************************** सोशल मीडिया अर्थात् सामाजिक प्रसार तंत्र या यूँ कहें विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की चौथी आँख। संचेतना संवेदना का अनवरत सजग सचेत अनवरत लोकमानस का सशक्त निष्पक्ष प्रहरी। जन-मन के हितचिन्तक,संसाधक,प्रमाणक पारदर्शी निश्छल दर्पण। पत्रकारिता,दूरदर्शन विविध मंच,फेसबुक,वाट्सएप,मैसेंजर,ब्लॉग,यू ट्यूब,इंस्टाग्राम,हाइक,मेल,गूगल आदि न जाने कितने अनगिनत पटल अबाध गतिमान मानवीय मूल्यों, … Read more

नेपाल की अनावश्यक आक्रामकता

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** लद्दाख के सीमांत पर भारत और चीन की फौजें अब मुठभेड़ की मुद्रा में नहीं हैं। पिछले दिनों ५-६ मई को दोनों देशों की फौजी टुकड़ियों में जो छोटी-मोटी झड़पें हुई थीं,उन्होंने चीनी और भारतीय मीडिया के कान खड़े कर दिए थे।दोनों तरफ के कुछ सेवा-निवृत्त फौजियों और पत्रकारों ने ऐसा माहौल … Read more

खुद को बचाते हुए बढ़ना होगा

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* जिस प्रकार जिव्हा दांतों में खुद को बचाते हुए अपना सम्पूर्ण कार्य कुशलता पूर्वक करती है। उसी प्रकार हमें अपने-आपको चारों दिशाओं से ‘कोरोना’ के चक्रव्यूह को भेदते हुए जीवन-यापन करना होगा,तभी हम स्वयं को बचाने में सफल होंगे।कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार द्वारा जो भी … Read more

रिश्ते-मर्यादा व खूबसूरती से निभाना सीखो

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* ‘मर्यादा’ एक व्यक्तिगत और भावनात्मक सीमा है। यह मनोवैज्ञानिक ढाल के रूप में काम करती है। इस सीमा के पैमाने पर ही हम अच्छे और संतुलित निजी-सामाजिक दोनों तरह के रिश्ते बनाते हैं।शिशु,जन्म के साथ ही अनेक रिश्तों के बंधन में बंध जाता है और माँ-पिता,भाई-बहन,दादा-दादी,नाना-नानी जैसे अनेक रिश्तों को जीवंत … Read more

देश को बचाने की जिम्मेदारी हम सबकी

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** ‘कोरोना’ के आँकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं और जिंदगी जो ठहर-सी गई थी,धीमे-धीमे रफ्तार भी पकड़ने लगी है। कुछ कंटेनमेंट क्षेत्र को छोड़कर बाकी हर जगह लगभग सारी गतिविधियां शुरू होने लगी हैं।जब कोरोना के मामले सैकड़ों में थे तो तालाबंदी लागू की गई,पर आज जब संक्रमण के … Read more

‘रणछोड़’ नीतीश और ‘धृतराष्ट्र’ लालू यादव…!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** देश में जारी कोरोना संकट के बीच नीतीश-लालू के प्रदेश बिहार में क्या चल रहा है, यह जानना दिलचस्प है। कोरोना विषाणु के कारण बिहार में अब तक ३० मौतें हुई हैं,जो कई बड़े राज्यों की तुलना में काफी कम है,लेकिन प्रदेश के राजनेताओं की दिलचस्पी अब कोरोना से लड़ने से ज्यादा … Read more