कर्मानुसार फल भोगना तय

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** जैन दर्शन के अनुसार ईश्वर विश्व निर्माता नहीं है। यदि सृष्टि निर्माता होता तो, सब जीवों को समान बनाता, पर ऐसा नहीं हुआ और यह सृष्टि अनादि अनंत है। इसमें हर जीव को अपने अपने कर्मानुसार कर्म का फल भोगना होता है। जिस-जिस जीव ने जो भी पूर्व कर्म किए हैं, उनका फल … Read more

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का परिणाम

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र में संवैधानिक अधिकार है’, यह सब भली-भांति जानते हैं, लेकिन ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ से संबद्ध सीमाओं को निर्धारित नहीं करते। अभिव्यक्ति मनुष्य के मनोभावों को प्रकट करने का साध्य व साधन दोनों है।वर्तमान में, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ सभ्य आचरण का परिचायक न होकर कुछ भी, … Read more

कश्मीर में आतंक नहीं, शांति का उजाला हो

ललित गर्गदिल्ली************************************** कश्मीर को ‘धरती का स्वर्ग’ कहा जाता है। यहां के बर्फ से ढके पहाड़ और खूबसूरत झीलें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। प्राकृतिक सुंदरता की वजह से इसे ‘भारत का स्विटजरलैंड’ भी कहा जाता है। इसी कारण यहां हर साल हजारों की संख्या में भारतीय और विदेशी पर्यटक आते हैं। हर किसी का … Read more

सावधानी बरतें, मौत और नपुंसकता को न बुलाएँ

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** भारत वर्ष एक स्वछन्द देश है। यहाँ सब प्रकार की छूट है, जैसे-अपराध हो, भ्रष्टाचार में, अनुशासनहीनता, मिलावट आदि जितनी जितना अधिक कर सको वह सब संभव है। दूसरा हमारे देश दूसरे देशों का पिछलग्गू है। जैसे अमेरिका के यहाँ जो सामग्री अनुपयोगी होती है, उसे हम अंधाधुंधकरण के कारण उसे सहर्ष स्वीकारते … Read more

समलैंगिक विवाह:अभिशाप और सामाजिक विकृति

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डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदी, इंदौर समलैंगिकता का मुद्दा सदियों से भारत में एक विवादास्पद विषय रहा है। समाज ने पारंपरिक रूप से विषमलैंगिकता को एक सामाजिक निर्माण के रूप में बरकरार रखा है, और इससे किसी भी विचलन को असामान्य और अस्वीकार्य माना गया है। इस संबंध में उभरी सबसे हालिया बहसों में से एक … Read more

उन्नत जीवन पुस्तक की जीवंतता से ही संभव

ललित गर्गदिल्ली************************************** ‘विश्व पुस्तक दिवस’ (२३ अप्रैल) विशेष… हर साल २३ अप्रैल को दुनियाभर में पुस्तक पढ़ने की प्रेरणा देने एवं पुस्तक संकृति को जीवंत बनाए रखने के लिए ‘विश्व पुस्तक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को किताबें पढ़ने, लाभ को पहचानने और बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। विलियम … Read more

भाषा के बदलते रूप

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* भाषा के बदलते रूप कई हैं-मसलन् राजनीतिक विचार में भाषा के अपने शब्द-अर्थ हैं, सामाजिक विचारों में उससे भिन्न शब्दार्थ होते हैं। अर्थ, धर्म व दार्शनिक चिंतन में विचारों के अपने सुगठित भाषायी शब्दार्थ हैं। यानि जिसका जैसा कार्य क्षेत्र, वैसे विचारधारा से जुड़े भाषाजनित शब्दार्थ मौजूद हैं। पाठक व आलोचक … Read more

जीवन-शैली में बदलाव से रहें स्वस्थ

ललित गर्गदिल्ली************************************** यकृत (लिवर) से संबंधित बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल १९ अप्रैल को ‘विश्व यकृत दिवस’ मनाया जाता है। शरीर के अन्य हिस्सों की तरह यह भी हमें स्वस्थ रखने में काफी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए उसका ख्याल रखना भी बेहद आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण … Read more

आधुनिकता में दम तोड़ रही सर्कस की उम्मीद

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** सर्कस एक जीवंत कलाकारी प्रदर्शन करने का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है, जिसमें मनोरंजन के साथ कलाकारों की एकाग्रता, अनुशासन एवं आपसी सूझबूझ का प्रदर्शन देखने को मिलता है। इसमें थोड़ी-सी चूक जीवन-मरण में प्राप्त होती है। यह मानव जीवन में बहुत श्रेष्ठ पाठ सीखने का सुन्दर अवसर होता है।आज के आधुनिक युग … Read more

बच्चों के प्रति संवेदनहीन समाज

ललित गर्गदिल्ली************************************** झारखण्ड में १ बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद कथित रूप से साढ़े ४ लाख रुपए में बेचने की शर्मनाक घटना ने संवेदनहीन होते समाज की त्रासदी को उजागर किया है। जहां इस घटना को माँ की संवेदनहीनता और क्रूरता के रूप में देखा जा सकता है, वहीं आजादी के अमृत काल … Read more