कुण्डलिया
मिटा दो कुरीति
संजय गुप्ता ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** जनता को भरमा रहे, करके नित पाखंड।सदा अधर्मी को मिले, इन कर्मों का दंड॥इन कर्मों का दंड, लूट का है यह धंधा।कर छल बहुत प्रपंच, रखें भक्तों को अंधा॥कह संजय देवेश, रहे क्यों अधर्म फलता।सजग रहें प्रत्येक, सबक सिखला दे जनता॥ पोंगा-पंडित कर रहे, यह पाखंड अधर्म।प्रभु का भी अब डर … Read more
सहना है हर दुःख को
बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************** सहना है हर दुःख को, सुख के दिन तो चार।बिना दुःख के सुख नहीं, रीत यही संसार॥रीत यही संसार, कर्म सबको है करना।प्यार मिले स्वीकार, किसी से क्यों है डरना॥कहे विनायक राज, किसी से कुछ मत कहना।भाग्य लिखा जो आज, सभी को सब कुछ सहना॥