फैल रही दूधिया चाँदनी
ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** फैल रही दूधिया चाँदनी,पूर्ण चन्द्र सुहावनी,पँख लगा मन उड़ पहुँचा,गगन पार उड़ावनी।देख रही धरती आनंदित,शीश तारे छाँव में-तारा मंडल बन सरिता सर,दीपदान मन भावनी॥ जनम-जनम साध हुई पूरी,मैं बनू मधु मानिनी,कभी-कभी रथ शशि की बैठूँ,बनती दिव्य दामिनी।निहारिका तक लम्बी पींगें,पुलकित है वसुंधरा-पांव फैला पवन हिंडोले,छेड़ूँ प्रेम रागिनी॥ सर-सर करते पवन झकोरे,संग देती ताल … Read more