बढ़ रही गर्मी,कट रहे पेड़

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** गर्मी देखो बढ़ रही,कटते जंगल पेड़। आओ पौधा रोप लो,बंजर धरती मेड़॥ मत काटो इंसान तुम,ये तो छायादार। गर्मी से रक्षा करे,पालन पोषण सार॥ जीव जगत इनसे जिए,इनसे है संसार। पेड़ लगा काटो नहीं,मत करना व्यापार॥ धरती का श्रृंगार है,पादप वृक्ष पहाड़। पर्यावरण बचाय लो,आव लगाव झाड़॥ सूरज … Read more

एक चेतावनी…

डॉ.मंजूलता मौर्या  मुंबई(महाराष्ट्र) ************************************************************* दरकते पहाड़,उफनती नदियाँ, समुद्र से आता हुआ मौत का सैलाब… आंधी से बर्बाद होते गाँव और शहर, एक चेतावनी है…। कहीं दहकता ज्वालामुखी है, कहीं भूकंप से काँपती धरती… और कहीं बादल का सीना फट जाना, एक चेतावनी है…। सूर्य देव क्रुद्ध हो आग बरसा रहे, इंद्र देव भी हमसे रुष्ठ … Read more

आम

हेमा श्रीवास्तव ‘हेमाश्री’ प्रयाग(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************* भोर सुहानी कोयल है कूजती, बहती शीतल बयार आयी आम की बहार। रसाल फल तो है राजा जिसके बड़े भाग वही चाखा, खट्टेपन से लड़कर जीता है वह वर्ष भर। फूल से फल बनने तक मंजरियाँ है महकती जब, तब ऋतु परिवर्तन होती है मधुमक्खी मीठा मधु ढोती है। यह … Read more

पावनी धरा..

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** नित जीवन का सृजन कर, पोषती व्यथाएं झेलकर। रस,साँस लेते हम सदा, निज वर्धन कर रहे खेलकर॥ देती अथाह पावनी धरा, इसे हम भी कुछ अर्पण करें। भू,जल,वायु नित शोधित रहे, अहा सब वृक्षारोपण करें॥ न घिरे धरा तम में देखना, हम ये विटप कटने न देंगे। ये घन पावन … Read more

किसे सुनाए ? सुने कौन ?

कैलाश मंडलोई ‘कदंब’ रायबिड़पुरा(मध्यप्रदेश) *********************************************************** जन की दारुण कथा व्यथा, किसे सुनाए ? सुने कौन? जिम्मेदार जो जन है इसके, देखो साधे बैठे मौन ? जीर्ण-शीर्ण-सा सूखा तन। पेट भूखा है विकल मन॥ न मंदिर न कोई शिवाला। भूखे को बस मिले निवाला॥ प्रश्न खड़े अनगिनत मौन। शोषित रुदन सुनता कौन॥ किसे सुनाए ? सुने … Read more

हल्का करो ज़रा मन को

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** जानते दीन को न दुनिया को, कह रहे हैं कि रहबरी दे दो। कह के हल्का करो ज़रा मन को, बेसबब दर्द क्यूँ रहे हो ढो। रब मआ़फ़ी ज़रूर देगा ही, मैल दिल का अगर लिया हो धो। काम कोई ग़लत नहीं होगा, ख़ौफ़ से रब के … Read more

तबाही लाएगी गर्मी

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** ऐसी गर्मी आएगी मिट्टी में तबाही लाएगी, पौधों को खूब सुखाएगी हरियाली दूर भगाएगी। ऐसा मंजर हो जाएगा दुनिया को खूब तपाएगा, दर्दनाक हो जाएगा फसल नहीं उग पाएगी। दूषित हो रहा है,जल और थल इसीलिए फटते हैं बादल, हर मंजर एक शोला होगा आग नहीं वह ज्वाला होगी। कांप उठेगी … Read more

धर्मयुद्ध

क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** जब रणभूमि में आ आमने-सामने शक्तियाँ धर्म अधर्म की टकरातीं हैं, योद्धाओं के सिंहनाद से यह धरा भयभीत होकर बार-बार थर्रातीं है। तब भी यदि कोई योद्धा किसी के बुलावे का मानो इंतज़ार करता है, देखे धर्म को लड़ते अधर्म से मात्र अपने ऊपर ही वह प्रहार करता है। हराने को … Read more

धूप और छाँव

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** धूप और छाँव की लुका-छिपी, कितनी अच्छी लगती है। धूप में जब थक जाओ, छाँव शीतलता देती है। धूप जीवन का कठोर समय है, छाँव ढलती शाम है। हे मानव ! तुम धूप से क्यों घबराते हो, कठिन परिश्रम करके तुम अपना भाग्य बनाते हो। छाँव में जब तुम सबके साथ, … Read more

मतदान

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** देश हित में बढ़-चढ़कर, आओ मिल मतदान करें। अपने वोट से नेता चुन, देश का गौरव गान करें॥ बहुमूल्य होता मतदान, व्यर्थ में न उसको गंवाएँ। ऐसे नेता को जितायें, जो विकास नीतियां अपनाएँ॥ नोट लेकर वोट न दें, अपने मत का सम्मान करें। नाप-तौल की वस्तु नहीं, मिलकर सब मतदान … Read more