शिव-शिवम, नम: नमन
ऋचा गिरिदिल्ली******************************** जो आदि शक्ति है, ना जिसका कोई अंत,जो मुक्तिस्वरूप, सर्वव्यापक, वही है जो ब्रह्मजो निराकार, ओंकार, कैलाशनाथ,वही विकाराल, महाकाल, है वो कृपाल। जो जटाओं में लिए हुए हैं गंग,जिनके माथे पर सुशोभित श्वेत चंद्रगले में सर्प माल है लटक रही,,वही तो है शिव: शिवम, उन्हें नमन नम: नमन। जिनके नेत्र है विशाल, गले … Read more