हिंदुस्तान में हिंदी

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )********************************************* जन मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)… हमारे देश के विभिन्न राज्य में भिन्न-भिन्न भाषाएं बोली जाती है, जैसे गुजरात में गुजराती, राजस्थान में मारवाड़ी, पंजाब में पंजाबी, महाराष्ट्र में मराठी, दक्षिण भारत में तेलुगू, मलयालम, कन्नड़, पूर्वोत्तर भारत में असमिया, बोडो, मणिपुरी, बंगाली आदि भाषाएं बोली जाती है। … Read more

मौन रहकर भी…

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ आधुनिक मीरा ‘महादेवी वर्मा’ (पुण्यतिथि विशेष)… मौन रहकर भी जिसने क्रांति का शंखनाद किया,हर बंधन को तोड़कर नवयुग का आगाज़ कियाबन वियोगिनी राधिका-सी पीड़ा पर अभिमान किया,नारी-अस्मिता का भव्य, अनूठा श्रृंगार किया। तुमने तो अपनी पीड़ा को करुणा का वरदान दिया,अक्षरों के मर्मस्थल को स्नेहिल सात्विक ज्ञान दियागुलमोहर की छाँव … Read more

हिन्दी जन-मन की भाषा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जन मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)… हिन्दी सब जन-मन की भाषा, संस्कृत-सुता अनुकूल समझिएहिन्दी भाव-विचारों की धारा, ज्ञान-सुधा रसकूल समझिए।जन-गण-मन में ध्वनि मुस्काती,है लोकतंत्र मजबूत बनाती-सरसा सहजा सुबोधा मधुरा, अखिल राष्ट्र अनुकूल समझिए॥ हिन्दी माटी-सुगंध सँजोती, लोक-सांस्कृतिक मूल समझिए,हिन्दी जन-मन-जीवन की थाती, अक्षय इसका कुल समझिये।ज्ञान-विज्ञान अनुकूल … Read more

प्रेरणा जगाती हिम्मत

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)********************************** कौन जगाता है सोई हिम्मत,जब मन हारने लगता है ?कौन अँधेरों के बीच खड़ा,उजियारा करने लगता है ? प्रेरणा जगाती सोई हिम्मत,मन में आशा का दीप जलाती हैठहरे हुए कदमों को वह,फिर से चलना सिखलाती है।  कभी गिरकर फिर उठने वाला,मन को साहस दे जाता हैपेड़ से टूटता पत्ता भी कभी,जीवन का … Read more

शिवोहम

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** जब ज्योति प्रेम की जलती है,मन में उजियाला करती हैकहीं भक्ति भावना जाग उठे,मन आप शिवाला करती है। मन आप शिवाला करती है,शिव धुन में ही रहती हैमिल जाए कोई शिव जैसा,शक्ति का रूप धर लेती है औघड़ दानी वरदान सहज,हर कंटक माला करती हैहर-हर बम-बम की धूम मची,कष्टों का निवाला करती … Read more

मैं हूँ स्त्री

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ***************************************** कहती हूँ सुनो- मैं हूँ स्त्री, मैं हूँ स्त्री,बिल्कुल भोली और बिल्कुल सीधीयहाँ मेरा अपना कोई घर-बार नहीं,फिर भी मेरे बिना कोई संसार नहीं। मैं पिता की लाड़ली, माँ की दुलारी,भाई की राखी, आँगन की फुलवारीससुराल की लक्ष्मी, मायके की जान हूँ,मैं पिता और पति दोनों का सम्मान हूँ। मैं … Read more

हिंदी तुझे मैं क्या लिखूं

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)****************************************** हिंदी तुझे मेरा बंधन,तन, मन, धन, जीवन अर्पणऐ हिंदी तुझे हर पल मैं लिखूं,मेरे माथे की तू बिंदी, हिंदी। क्या अब, क्या कल, क्या बरसों ?जनम-जनम के जज्बात मैं लिखूं,मेरे हिंदी तुझे हर बार लिखूं,अपना मन, अपना स्वप्न लिखूं। जीवन लिख दूं जन्म-जन्म लिख दूं,हे हिंदी तुझे मैं हर बार लिखूंमधुर मिलन … Read more

भ्रम जाल

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* भ्रम जगती का जाल, मनुज फॅंसता ही जाता।माया का जंजाल, सभी को ये उलझाता॥मिले न मानव देह, जगत में हर  प्राणी को।मधुर सुसंस्कृत बोल, मिले न हर वाणी को॥ भ्रममय ये संसार, सत्य सब  इसको जाने।मात्र ब्रह्म है सत्य, नहीं उसको  पहचाने॥जीवन का है ध्येय, मुक्त जग से हो जाएं।जीवन मृत्यु विमुक्त, शिव सायुज्य को पाएं॥ भ्रम जो पाले जीव, सदा अवनति को पाते।भटके जीवन राह, … Read more

हिमालय रक्षक

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)*************************************** है गिरिराज हिमालय बनकर चौकीदार खड़ा,रिपु किंचित आ नहीं सकता रक्षक बन अड़ा। भारत का है गौरव हिमगिरि मंगलगीत सुनाता,वन से भरा हुआ है हरीतिमा को बिखराता। हवा हमें सुहानी देता वनोपज से दुलराता,बना हुआ है प्यारा हरदम सबको ही भाता। पर्यावरण का रक्षक नित ही देता है साँसें,पर अब उसे … Read more

पापा, लौट आओ ना…

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ***************************************** पापा फिर से लौट आओ ना,अपने में मुझे फिर समेट लो नादुनिया की भीड़ में खो गया हूँ मैं, आपके बिना पापा हताश हो गया हूँ मैं।  आपकी फटकार में छिपा था प्यार,आपके वचनों में समाया था संसारआपके जाने के बाद संसार सूना है,हर खुशी अब अधूरी आपके बिना है। बहुत … Read more